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पूर्णिया में 131 साल पुराने श्यामा काली मंदिर पर गिरा ठनका, 108 फीट ऊंचा गुंबद क्षतिग्रस्त

पूर्णिया में 131 साल पुराने श्यामा काली मंदिर पर गिरा ठनका,
ठनका से 108 फीट ऊंचा गुंबद क्षतिग्रस्त- फोटो : अंकित कुमार

Purnia : जिले के भटोत्तर गांव स्थित ऐतिहासिक और भव्य श्यामा काली मंदिर पर शनिवार सुबह अचानक भीषण वज्रपात (ठनका) हो गया। सुबह करीब 7 बजे तेज बारिश के साथ हुए इस हादसे के कारण 108 फीट ऊंचे मंदिर का मध्य गुंबद फट गया और शिखर का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। जोरदार आवाज के साथ हुए इस हादसे के तुरंत बाद मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर चल रहा है नवनिर्माण 

सुखसेना पश्चिम पंचायत के पूर्व मुखिया ध्रुव सिंह और बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि यह 131 साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर है, जिसका 1995 में पुनर्निर्माण कराया गया था। पिछले तीन वर्षों से कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का भव्य नवनिर्माण कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के बीच अचानक हुए इस प्राकृतिक हादसे से मंदिर के ऊपरी ढांचे और नक्काशीदार गुंबद को काफी नुकसान पहुंचा है।

संयोग से पिछले साल भी शनिवार को ही मंदिर के पास गिरा था ठनका 

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सुबह 7 बजे अचानक तेज कड़क के साथ आकाशीय बिजली सीधे मंदिर के सबसे ऊपरी शिखर पर आ गिरी। ग्रामीणों ने एक अजीब संयोग का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले साल भी शनिवार के ही दिन मंदिर के समीप वज्रपात हुआ था और इस बार भी शनिवार को ही मंदिर पर ठनका गिरा। लगातार दो वर्षों में शनिवार के दिन ही इस तरह की घटना होने से इलाके के लोग हैरान हैं।

धार्मिक त्रुटि या सुरक्षा उपाय की कमी को लेकर चर्चा तेज 

बिजली गिरने के समय मंदिर के आसपास लोगों की मौजूदगी कम रहने से एक बड़ा हादसा टल गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, मंदिर के क्षतिग्रस्त होने से श्रद्धालुओं में गहरी चिंता है। गांव के कुछ लोगों का मानना है कि निर्माण या धार्मिक अनुष्ठानों में कहीं न कहीं कोई त्रुटि हुई है, जिसके कारण बार-बार मंदिर पर ऐसी घटनाएं हो रही हैं। वहीं कुछ लोग तड़ित चालक (लाइटनिंग एरेस्टर) की कमी को इसका मुख्य कारण मान रहे हैं।

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क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और सुरक्षा बढ़ाने की मांग 

घटना की सूचना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मंदिर परिसर में एकत्र होकर नुकसान का जायजा ले रहे हैं। ग्रामीणों ने मंदिर प्रबंधन समिति से मांग की है कि क्षतिग्रस्त गुंबद की अविलंब मरम्मत कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए मंदिर के शिखर पर मजबूत तड़ित रोधी उपकरण लगाए जाएं ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

अंकित की रिपोर्ट