Bihar Transport Department: खींचतान में अटकी पोस्टिंग,1.5 साल से नहीं हुआ ESI का तबादला! विभाग में पीत-पत्र का दौर जारी

लगभग 26 नए MVI और ESI पिछले 2 महीने से Waiting for Posting के इंतजार में बैठे हैं।नियमों के मुताबिक हर 6 महीने में होने वाला ESI का तबादला पिछले 1.5 साल से अटका पड़ा है।शीर्ष स्तर के इस विवाद की कीमत नवनियुक्त अधिकारियों को चुकानी पड़ रही है।

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खींचतान में अटकी पोस्टिंग,1.5 साल से नहीं हुआ ESI का तबादला! - फोटो : news 4 nation AI

बिहार परिवहन विभाग में नवचयनित लगभग 26 नए मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) और प्रवर्तन अवर निरीक्षक (ESI) पिछले दो महीने से बिना किसी तैनाती के बैठे हुए हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इन अधिकारियों को अब तक जिला या अनुमंडल स्तर पर कोई पदस्थापना (वेटिंग फॉर पोस्टिंग) नहीं मिली है। विभाग में पद खाली होने और अधिकारियों की कमी के बाद भी नवनियुक्त कर्मियों को कार्यभार न सौंपे जाने से उनके बीच भारी असमंजस और निराशा का माहौल बना हुआ है।


नियमों की अनदेखी, 1.5 साल से अटका है ESI का तबादला

परिवहन विभाग के विभागीय नियमों के अनुसार हर छह महीने पर प्रवर्तन अवर निरीक्षकों (ESI) के तबादले की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। हालांकि, वास्तविकता यह है कि पिछले डेढ़ साल से ESI स्तर के किसी भी अधिकारी का तबादला नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, इस साल जून के नियमित तबादला सत्र में भी एक भी MVI या ESI का स्थानांतरण नहीं हो सका, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


DTO और ADTO विवाद की बलि चढ़े निचले अधिकारी

विभाग में इस अड़चन के पीछे का मुख्य कारण जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) और सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) के तबादलों को लेकर बना विवाद बताया जा रहा है। उच्च स्तरीय पदों के ट्रांसफर और पोस्टिंग की खींचतान के कारण MVI और ESI जैसे निचले स्तर के तकनीकी व प्रवर्तन अधिकारियों की तैनाती प्रक्रिया भी अधर में लटक गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब विवाद शीर्ष अधिकारियों के पदों को लेकर है, तो फिर MVI और ESI की नियमित पोस्टिंग पर रोक क्यों लगाई गई है।


मंत्री और सचिव के बीच खींचतान, चल रहा पीत-पत्र का दौर

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परिवहन विभाग में इस गतिरोध की मुख्य वजह मंत्री और विभागीय सचिव के बीच आपसी तालमेल की कमी है। तबादलों और पदस्थापना की फाइलों को लेकर दोनों के बीच लगातार पीत-पत्र (ऑफ़िशियल नोट) का दौर जारी है। नीतिगत फैसलों और पसंद के अधिकारियों की तैनाती को लेकर जारी इस अंदरूनी प्रशासनिक खींचतान का सीधा असर विभागीय कामकाजों और नए अधिकारियों के भविष्य पर पड़ रहा है।