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सुपौल में जलजमाव वाले क्षेत्रों से संवरेगी किसानों की तकदीर: DDC ने किया निरीक्षण, 3-4 दिनों में सर्वे का निर्देश

सुपौल में जलजमाव वाले क्षेत्रों से संवरेगी किसानों की तकदीर:
सुपौल में जलजमाव वाले क्षेत्रों से संवरेगी किसानों की तकदीर- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले में फैले जल क्षेत्रों को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने और वैज्ञानिक मत्स्य पालन की संभावनाओं को तराशने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। इसी सिलसिले में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) इंद्रवीर कुमार ने किशनपुर और सरायगढ़ प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न जलजमाव वाले इलाकों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पूरे साल पानी से भरे रहने वाले क्षेत्रों का जायजा लिया और उन्हें योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने पर चर्चा की।


राष्ट्रीय राजमार्ग के पास बने जलजमाव वाले क्षेत्रों का होगा उपयोग

डीडीसी ने निरीक्षण के दौरान पाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास और अन्य स्थानों पर सालभर पानी जमा रहता है। यदि इन क्षेत्रों को चिह्नित कर आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, तो यहां आधुनिक और व्यवस्थित तरीके से बड़े पैमाने पर मछली पालन कराया जा सकता है। इससे न केवल अनुपयोगी जल संसाधन काम में आएंगे, बल्कि स्थानीय लोगों और किसानों के लिए रोजगार व आय के नए रास्ते भी खुलेंगे।


तीन से चार दिनों के भीतर सर्वे कर नक्शा तैयार करने का आदेश

उप विकास आयुक्त ने सरायगढ़ और किशनपुर अंचल के अधिकारियों व कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे तीन से चार दिनों के अंदर जल क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कर नक्शा तैयार करें। इस सर्वे में विशेष रूप से उन इलाकों को चिह्नित करने को कहा गया है, जहां सालभर पानी भरा रहता है। इसके आधार पर ही आगे की कार्ययोजना बनाकर मत्स्य पालन का खाका तैयार किया जाएगा।


जिला मत्स्य अधिकारी जिलाधिकारी को सौंपेंगे विस्तृत रिपोर्ट

डीडीसी ने जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार को सभी जरूरी आंकड़े और जानकारियां एकत्रित कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। इस रिपोर्ट को अंतिम स्वीकृति और आगे की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर देने को कहा गया है।


किसानों की बढ़ेगी आय, स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

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जिला प्रशासन की इस दूरगामी पहल से जिले में किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देकर प्रेरित किया जाएगा। सामूहिक और व्यवस्थित रूप से मत्स्य पालन शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों में इजाफा होगा और किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। निरीक्षण के दौरान जिला मत्स्य पदाधिकारी के साथ-साथ दोनों अंचलों के राजस्व कर्मचारी, अंचल अमीन और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। 

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट