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नवादा के सरकारी कर्मियों की बड़ी पहल: जेब से पैसे जुटाकर 67 टीबी मरीजों को लिया गोद, उठाएंगे राशन-पोषण का खर्च

नवादा के सदर प्रखंड में एक मिसाल पेश की गई है। यहाँ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने सरकारी फंड के भरोसे रहने के बजाय अपनी निजी बचत से 67 टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी संभाली है।

नवादा के सरकारी कर्मियों की बड़ी पहल: जेब से पैसे जुटाकर 67 ट

Nawada - नवादा जिले के सदर प्रखंड में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शैलेश कुमार की अगुवाई में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह पूरी तरह सरकारी नहीं, बल्कि कर्मियों की एक निजी मुहिम थी। नि-क्षय मित्र योजना के तहत स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जेब से पैसा निकालकर 67 टीबी मरीजों को गोद लिया। ये सभी कर्मी अगले छह महीनों तक इन मरीजों के पोषण और घरेलू सामग्री की जिम्मेदारी उठाएंगे। 

विधायक विभा देवी ने की पहल की सराहना

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जदयू विधायक विभा देवी ने कर्मियों के इस जज्बे की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों द्वारा निजी स्तर पर आगे आकर समाज की सेवा करना एक बड़ा संदेश देता है। विभा देवी ने जोर देकर कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही और समाज को इन मरीजों के साथ खड़े होने की जरूरत है। उन्होंने ऐसी पहलों को पूरे जिले में चलाने की अपील की। 

पोषण और जागरूकता: दोहरे लक्ष्य पर वार

सदर प्रखंड विकास चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों को सही पोषण देना है, जो इलाज के दौरान बहुत जरूरी होता है। इसके साथ ही, इस आयोजन के जरिए समाज में टीबी को लेकर व्याप्त पुरानी धारणाओं और छुआछूत जैसी कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास किया गया है। मरीजों को राशन और घरेलू जरूरत का सामान वितरित कर उन्हें यह अहसास कराया गया कि समाज उनके साथ है। 

नि-क्षय मित्र योजना: सामुदायिक भागीदारी की मिसाल

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य देश को टीबी मुक्त बनाना है। इसी के तहत 'नि-क्षय मित्र' योजना काम करती है, जिसमें कोई भी व्यक्ति या संस्था स्वेच्छा से मरीजों को गोद ले सकती है। नवादा के इस कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार चौधरी, डीपीएम अमित कुमार और अरवल के सिविल सर्जन डॉ. राज किशोर प्रसाद ने भी शिरकत की और इसे सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। 

भ्रांतियों को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने लोगों को जानकारी दी कि टीबी पूरी तरह इलाज योग्य है। सरकारी कर्मियों की इस पहल से न केवल मरीजों को आर्थिक मदद मिली है, बल्कि स्थानीय लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग व्यक्तिगत रूप से मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं, तो आम जनता में टीबी के प्रति डर कम होता है और लोग इलाज के लिए आगे आते हैं। 

बिहार के अन्य जिलों के लिए बनेगा प्रेरणा

नवादा में सरकारी कर्मियों की यह निजी पहल अब राज्य के अन्य हिस्सों के लिए एक मॉडल बन सकती है। यह आयोजन साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो बिना किसी विशेष सरकारी बजट के भी समाज के सबसे कमजोर तबके की मदद की जा सकती है। मरीजों को न केवल सामग्री दी गई, बल्कि उन्हें सरकार की अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ हो सकें।

Report - aman sinha

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