LATEST NEWS

  • Bihar Food Safety
  • Bihar Food Safety : बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कितने शुद्ध? ऐसे करें मिलावट की पहचान, जानें

  • Bihar Mobile Users
  • Bihar Mobile Users:आपके नाम पर कितने सिम कार्ड चल रहे हैं? घर बैठे ऐसे करें चेक, फर्जी नंबर

  • Bihar E Cabinet
  • Bihar Cabinet Meeting: मंत्रियों के हाथ में होगी डिजिटल फाइल,बिहार में अब ऐसे होगी कैबिनेट की बैठक

  • Bihar Ration Card
  • Bihar Ration Card:बिहार में 35 लाख से ज्यादा राशन कार्ड रद्द! चेक कर लीजिए लिस्ट में आपका

  • Bihar MLC Election Results
  • Bihar MLC Election Results : 150 प्रत्याशियों की धड़कनें तेज, आज खुलेगा सियासी किस्मत का पिटारा,देर रात तक

बिहार में पाँच दिन की कार्य प्रणाली की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे सरकारी बैंककर्मी, हड़ताल कर हुकूमत से डिमांड

Bihar Bank strike: सप्ताह में पाँच दिन की कार्य प्रणाली लागू करने की माँग को लेकर देशभर के बैंक कर्मियों ने एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल कर सरकार को सीधा पैग़ाम दिया।

Government bank employees took to the streets in Bihar
बिहार में पाँच दिन की कार्य प्रणाली की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे सरकारी बैंककर्मी- फोटो : reporter

Bihar Bank strike: सप्ताह में पाँच दिन की कार्य प्रणाली लागू करने की माँग को लेकर देशभर के बैंक कर्मियों ने एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल कर सरकार को सीधा पैग़ाम दिया। इस हड़ताल का असर सार्वजनिक और निजी दोनों ही सेक्टर के बैंकों में साफ़ तौर पर नज़र आया। कई जगहों पर बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे, काउंटर सूने दिखे और लेन-देन के लिए पहुँचे ग्राहक मायूस होकर लौटते रहे।

बिहार शरीफ में इस हड़ताल ने ज़ोरदार शक्ल अख़्तियार की। अलग-अलग बैंकों के कर्मचारी अस्पताल चौक पर जमा हुए और इत्तिहाद का प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की। हाथों में बैनर-पोस्टर थे, ज़ुबान पर एक ही माँग “पाँच-डे वर्किंग सिस्टम लागू करो।” प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब देश के कई अन्य विभागों और सेक्टरों में सप्ताह में पाँच दिन काम का नियम लागू है, तो फिर बैंक कर्मियों के साथ भेदभाव क्यों?

बैंक यूनियनों का इल्ज़ाम है कि बढ़ते कार्यभार और लगातार छह दिन काम करने के दबाव ने कर्मचारियों के सेहत और पारिवारिक ज़िंदगी पर गहरा असर डाला है। उनका कहना है कि पाँच दिन की कार्य प्रणाली से न सिर्फ़ वर्क-लाइफ़ बैलेंस बेहतर होगा, बल्कि कर्मचारियों की कार्यक्षमता और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। “थका हुआ कर्मचारी बेहतर सेवा नहीं दे सकता” यह जुमला प्रदर्शन का अहम हिस्सा बना।

हड़ताल के चलते नक़द लेन-देन, चेक क्लियरेंस और काउंटर से जुड़ी ज़्यादातर सेवाएँ प्रभावित रहीं। एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाएँ सामान्य रहीं, लेकिन ग्रामीण और बुज़ुर्ग ग्राहकों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि बार-बार की हड़ताल से आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है, जबकि बैंक कर्मियों का जवाब था कि यह लड़ाई लंबी राहत के लिए है।

NSIT
Nsmch

बैंक यूनियनों ने साफ़ अल्फ़ाज़ में चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी माँगों पर गंभीरता से ग़ौर नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। बिहार शरीफ की सड़कों पर गूंजती यह आवाज़ सिर्फ़ एक हड़ताल नहीं, बल्कि नीति और नीयत पर सवाल है। अब देखना यह है कि हुकूमत इस इशारे को समझती है या फिर यह हुंकार आने वाले दिनों में और बुलंद होती है।

रिपोर्ट- राज पाण्डेय