बिहार में पाँच दिन की कार्य प्रणाली की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे सरकारी बैंककर्मी, हड़ताल कर हुकूमत से डिमांड
Bihar Bank strike: सप्ताह में पाँच दिन की कार्य प्रणाली लागू करने की माँग को लेकर देशभर के बैंक कर्मियों ने एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल कर सरकार को सीधा पैग़ाम दिया।

Bihar Bank strike: सप्ताह में पाँच दिन की कार्य प्रणाली लागू करने की माँग को लेकर देशभर के बैंक कर्मियों ने एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल कर सरकार को सीधा पैग़ाम दिया। इस हड़ताल का असर सार्वजनिक और निजी दोनों ही सेक्टर के बैंकों में साफ़ तौर पर नज़र आया। कई जगहों पर बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे, काउंटर सूने दिखे और लेन-देन के लिए पहुँचे ग्राहक मायूस होकर लौटते रहे।
बिहार शरीफ में इस हड़ताल ने ज़ोरदार शक्ल अख़्तियार की। अलग-अलग बैंकों के कर्मचारी अस्पताल चौक पर जमा हुए और इत्तिहाद का प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की। हाथों में बैनर-पोस्टर थे, ज़ुबान पर एक ही माँग “पाँच-डे वर्किंग सिस्टम लागू करो।” प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब देश के कई अन्य विभागों और सेक्टरों में सप्ताह में पाँच दिन काम का नियम लागू है, तो फिर बैंक कर्मियों के साथ भेदभाव क्यों?
बैंक यूनियनों का इल्ज़ाम है कि बढ़ते कार्यभार और लगातार छह दिन काम करने के दबाव ने कर्मचारियों के सेहत और पारिवारिक ज़िंदगी पर गहरा असर डाला है। उनका कहना है कि पाँच दिन की कार्य प्रणाली से न सिर्फ़ वर्क-लाइफ़ बैलेंस बेहतर होगा, बल्कि कर्मचारियों की कार्यक्षमता और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। “थका हुआ कर्मचारी बेहतर सेवा नहीं दे सकता” यह जुमला प्रदर्शन का अहम हिस्सा बना।
हड़ताल के चलते नक़द लेन-देन, चेक क्लियरेंस और काउंटर से जुड़ी ज़्यादातर सेवाएँ प्रभावित रहीं। एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाएँ सामान्य रहीं, लेकिन ग्रामीण और बुज़ुर्ग ग्राहकों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि बार-बार की हड़ताल से आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है, जबकि बैंक कर्मियों का जवाब था कि यह लड़ाई लंबी राहत के लिए है।
बैंक यूनियनों ने साफ़ अल्फ़ाज़ में चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी माँगों पर गंभीरता से ग़ौर नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। बिहार शरीफ की सड़कों पर गूंजती यह आवाज़ सिर्फ़ एक हड़ताल नहीं, बल्कि नीति और नीयत पर सवाल है। अब देखना यह है कि हुकूमत इस इशारे को समझती है या फिर यह हुंकार आने वाले दिनों में और बुलंद होती है।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय















