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Patna High Court: अस्थावां प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ब्रेक! पटना हाईकोर्ट ने BDO के आदेश पर लगाई रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने नालंदा जिले के अस्थमा प्रखंड में सियासी उठापटक पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

Asthawan Nalanda No Confidence Move Halted HC Stays BDO Orde
अस्थावां प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक! - फोटो : reporter

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने अस्थावां,नालंदा के कार्यपालक पदाधिकारी सह  प्रखंड विकास पदाधिकारी के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके द्वारा याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध अविश्वास पर विचार के लिए पंचायत समिति की विशेष बैठक बुलाई थी।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने अस्थावां,नालंदा के प्रमुख रोहित कुमार और उपप्रमुख  विशुन देव सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का  निर्देश दिया है। कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी,अस्थावां,नालंदा ने 19 फरवरी,2026 को एक विशेष बैठक बुलाने का आदेश जारी किया।इसमें 27फरवरी, 2026 को अस्थावां,नालंदा के प्रमुख व उपप्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर पंचायत समिति द्वारा विचार किया जाना था।प्रमुख रोहित कुमार व उपप्रमुख विशुन देव सिंह  ने आपत्ति की कि अविश्वास प्रस्ताव  पर कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी को दस दिनों में बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है ।

यह अंतरिम आदेश जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने अस्थमा, नालंदा के प्रमुख रोहित कुमार और उपप्रमुख विशुन देव सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रतिवादी संख्या 6 से 26 तक को नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

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कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी, अस्थावां, नालंदा ने 19 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर 27 फरवरी 2026 को विशेष बैठक बुलाने की तिथि तय की थी। इस बैठक में प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विचार होना था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार ने दलील दी कि यह कार्रवाई बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 की धारा 44(3)(1) के विरुद्ध है। अधिवक्ता के अनुसार, अधिनियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने का प्राथमिक अधिकार प्रमुख को है, जिसे 15 दिनों के भीतर तिथि निर्धारित करनी होती है। यदि वह ऐसा करने में असफल रहते हैं, तभी उपप्रमुख या एक-तिहाई निर्वाचित सदस्य तिथि तय कर सकते हैं।

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दलील दी गई कि 9 फरवरी 2026 को दिए गए आवेदन पर BDO द्वारा सीधे 27 फरवरी की तिथि निर्धारित करना कानूनन अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसी आधार पर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार, रितिका रानी और वरदानमंगलम ने तथ्य रखे। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अस्थमा प्रखंड की सियासी सरगर्मी पर अस्थायी विराम लग गया है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।