LATEST NEWS

  • Anant Singh MLA Status
  • Bihar Politics: अनंत सिंह की विधायकी पर लटकी तलवार! JDU की अर्जी पर अब इस दिन तय होगा

  • Bihar TRE-4
  • BPSC TRE-4 ने तोड़े भर्ती के सारे रिकॉर्ड, आवेदन के आंकड़े पढ़ कर चौक जाएंगे आप

  • Bihar Food Safety
  • Bihar Food Safety : बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कितने शुद्ध? ऐसे करें मिलावट की पहचान, जानें

  • Bihar Mobile Users
  • Bihar Mobile Users:आपके नाम पर कितने सिम कार्ड चल रहे हैं? घर बैठे ऐसे करें चेक, फर्जी नंबर

  • Bihar E Cabinet
  • Bihar Cabinet Meeting: मंत्रियों के हाथ में होगी डिजिटल फाइल,बिहार में अब ऐसे होगी कैबिनेट की बैठक

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी SDPO राजेश शर्मा का पुराना रिकॉर्ड, 19 साल पहले मुजफ्फरपुर में लगे थे गंभीर आरोप

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी SDPO राजेश शर्मा का पुराना इतिहास सामने आया है. 19 साल पहले मुजफ्फरपुर एनकाउंटर से भी उनका नाता रहा है.....पढ़िए आगे

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी SDPO राजेश शर्मा क
आरोपों का सिलसिला - फोटो : MANIBHUSHAN

MUZAFFARPUR : भोजपुर में हुए चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में आरोपी बनाए गए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेश शर्मा एक बार फिर चर्चा में हैं। यह पहला मौका नहीं है जब वे किसी एनकाउंटर को लेकर विवादों और आरोपों के घेरे में आए हों। इससे करीब 19 वर्ष पूर्व, मुजफ्फरपुर में हुए एक ट्रिपल एनकाउंटर के दौरान भी तत्कालीन थानेदार राजेश शर्मा सुर्खियों में आए थे और उन पर फर्जी एनकाउंटर के गंभीर आरोप लगे थे, हालांकि बाद में जांच टीम ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।

क्या था 19 साल पुराना मुजफ्फरपुर एनकाउंटर?

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित एमआईटी कॉलेज के समीप का है। 4 नवंबर 2007 की अहले सुबह करीब 4 बजे पुलिस और अपराधियों के बीच एक कथित मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में तीन युवकों—लहलादपुर पताही (सदर थाना) निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा और शिवहर जिले के धनकौल निवासी सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि वाहन चेकिंग के दौरान जब इन युवकों को रोकने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने पुलिस टीम पर करीब 22 राउंड गोलियां बरसा दीं। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीनों युवक मारे गए।

बयानों में विरोधाभास और बैलेस्टिक रिपोर्ट पर सवाल

इस मुठभेड़ को लेकर तत्कालीन डीआईजी अरविंद पांडे ने गंभीर सवाल उठाए थे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने की अनुशंसा की थी। हालांकि, बाद में हुई सीआईडी जांच रिपोर्ट में सभी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन मानवाधिकार आयोग ने इस जांच पर कड़ा असंतोष जताया था। असंतोष की मुख्य वजह पुलिस अधिकारियों और पुलिस वाहन के चालक के बयानों में भारी विरोधाभास था। जहां एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों का कहना था कि चेकिंग के दौरान रोके जाने पर युवकों ने फायरिंग की, वहीं चालक ने बयान दिया था कि पुलिस ने पीछा करके युवकों पर गोलियां चलाई थीं। इसके अलावा, सबसे बड़ा चौंकाने वाला तथ्य बैलेस्टिक रिपोर्ट से सामने आया था, जिसमें मृत युवकों के हाथों पर फिंगरप्रिंट या 'हैंड वॉश' का कोई सबूत नहीं मिला था।

मानवाधिकार आयोग ने माना था 'फर्जी एनकाउंटर'

मुठभेड़ की थ्योरी को खारिज करते हुए मानवाधिकार आयोग ने इसे पूरी तरह 'फर्जी एनकाउंटर' करार दिया था। मारे गए युवक मनीष कुमार की मां सहित अन्य परिजनों ने भी पुलिस पर सुनियोजित हत्या के गंभीर आरोप लगाए थे। आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन सदर थानेदार राजेश कुमार शर्मा सहित एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों को दोषी माना था और सरकार को सभी मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर भुगतान करने का आदेश दिया था।

NSIT
Nsmch

आरा मामले के बाद फिर उठे सवाल

अब जब 19 साल बाद एक बार फिर भोजपुर के भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में एसडीपीओ राजेश शर्मा का नाम आरोपी के रूप में सामने आया है, तो मुजफ्फरपुर के उस पुराने और विवादित एनकाउंटर की यादें ताजा हो गई हैं। इतिहास के इन पन्नों के पलटने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मणिभूषण की रिपोर्ट