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Bihar Crime:सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी ICU में दे रहे थे सेवा, प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में फंसे डॉक्टर पंकज पर लटकी निलंबन की तलवार, ये कैसी नौकरी

Bihar Crime:सात लोगों की जान लेने वाले प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और अब सरकारी सेवा में तैनात एक डॉक्टर की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। ...

Muzaffarpur Fire Case Govt Doctor Faces Possible Suspension
सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी ICU में दे रहे थे सेवा- फोटो : reporter

Bihar Crime: मुजफ्फरपुर के चर्चित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। सात लोगों की जान लेने वाले इस दर्दनाक हादसे के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और अब सरकारी सेवा में तैनात एक डॉक्टर की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। बंदरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कार्यरत डॉ. पंकज कुमार पर आरोप है कि वे अपनी सरकारी जिम्मेदारियों को छोड़कर निजी अस्पताल के आईसीयू की कमान संभाल रहे थे। इतना ही नहीं, जिस वक्त आईसीयू में आग लगी, उस दौरान उनके ड्यूटी स्थल से गायब रहने की बात भी सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक गुरुवार की अहले सुबह प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी। उस समय आईसीयू की जिम्मेदारी डॉ. पंकज कुमार के पास थी। हादसे के बाद हुई जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर ब्रह्मपुरा थाना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। हालांकि अदालत से उन्हें तत्काल जमानत मिल गई, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और निलंबन की तलवार लटक रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। विभागीय टीम बंदरा पीएचसी के उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि जिस समय सरकारी अस्पताल में उनकी ड्यूटी होनी चाहिए थी, उस दौरान वे निजी अस्पताल के आईसीयू में किस आधार पर कार्य कर रहे थे।

इस पूरे मामले पर अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार ने कहा है कि जांच जारी है और सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि डॉ. पंकज कुमार ने सरकारी नियमों का उल्लंघन किया है या ड्यूटी में लापरवाही बरती है, तो उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक सरकारी चिकित्सक, जिसकी जिम्मेदारी सरकारी अस्पताल में मरीजों की सेवा करना है, वह निजी नर्सिंग होम के आईसीयू का संचालन कैसे कर रहा था? और जब हादसा हुआ तो वह मौके पर मौजूद क्यों नहीं था? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि डॉक्टर साहब पर सिर्फ गिरफ्तारी की कार्रवाई तक मामला सीमित रहेगा या फिर सरकारी सेवा से निलंबन जैसी बड़ी कार्रवाई भी होगी।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा