मुजफ्फरपुर में गजब का फर्जीवाड़ा: हादसे के बाद से खड़ी गाड़ी का 4 महीने बाद काटा ₹7500 का ई-चालान
बिहार में सिस्टम की बड़ी लापरवाही! मुजफ्फरपुर में 14 फरवरी के हादसे के बाद से खड़ी कार पर 13 जून को ओवरस्पीडिंग का ₹7500 का ई-चालान ठोक दिया गया। पीड़ित गाड़ी मालिक ने सीएम हेल्पलाइन में गुहार लगाकर फर्जी चालान रद्द करने और डिजिटल सबूत की मांग की है

मुजफ्फरपुर जिले में एक ही चार पहिया वाहन (BR06AL9427) को लेकर दो परस्पर विरोधी मामले सामने आने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर जहाँ यह वाहन महीनों से एक दर्दनाक हादसे के बाद से क्षतिग्रस्त अवस्था में खड़ा है, वहीं दूसरी ओर विभाग द्वारा इस पर ओवरस्पीडिंग का नया चालान काट दिया गया है। मामला अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुँच गया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
फरवरी में हुआ था दर्दनाक हादसा, एक की मौत
पहला मामला 14 फरवरी 2025 का है, जहाँ कांटी थाना क्षेत्र में इसी बलेनो गाड़ी (BR06AL9427) की चपेट में आने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई थी। पीड़िता मालती देवी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उनके पति शम्भू साह सड़क किनारे खड़े थे, तभी तेज रफ्तार गाड़ी ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में शम्भू साह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस संबंध में कांटी थाने में मामला दर्ज किया गया था।

चार महीने बाद काटा गया 7500 रुपये का ई-चालान
दूसरा चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब हादसे के चार महीने बाद 13 जून 2025 की तारीख में इसी गाड़ी पर ओवरस्पीडिंग का हवाला देते हुए ₹7500 का ई-चालान काट दिया गया। गाड़ी मालिक विकास कुमार पटेल (निवासी बरतौलिया, पारू) ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि 14 फरवरी के हादसे के बाद से ही वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है और चलने की स्थिति में ही नहीं है, ऐसे में सड़क पर दौड़ने और ओवरस्पीडिंग का सवाल ही पैदा नहीं होता।
गाड़ी मालिक ने उठाए तीन गंभीर सवाल
इस संदिग्ध चालान को लेकर वाहन मालिक विकास पटेल ने प्रशासन और परिवहन विभाग से तीन प्रमुख सवाल पूछे हैं:
खड़ी गाड़ी का चालान कैसे: जब 14 फरवरी से गाड़ी गैरेज/थाने में खड़ी है, तो जून में ओवरस्पीडिंग कैसे संभव है?
सबूत का अभाव: बिना किसी प्रमाणिक फोटो या वीडियो के केवल पुरानी एफआईआर के आधार पर चालान काटना सरासर गलत है।
घटनास्थल में भिन्नता: दुर्घटना का स्थल 'अहियारी चौक, जेतपुर' दर्ज है, जबकि चालान में घटना का स्थान 'रामदयालु नगर' दर्शाया गया है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत, चालान रद्द करने की मांग
गाड़ी मालिक का कहना है कि पूर्व में डीटीओ (DTO) मुजफ्फरपुर ने मानवीय आधार पर ₹5000 का जुर्माना माफ किया था, लेकिन अब बिना किसी भौतिक सत्यापन के ₹7500 का नया चालान भेज दिया गया है। पीड़िता को न्याय मिलने का इंतजार है और दूसरी तरफ वाहन मालिक फर्जी चालान की दोहरी मार झेल रहा है। विकास पटेल ने 13 जून के कथित अपराध का डिजिटल साक्ष्य मांगा है तथा शेष चालान को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की गुहार मुख्यमंत्री सचिवालय से लगाई है।
विभाग ने कहा
हालांकि परिवहन विभाग की ओर से बताया गया की संबंधित ई-चालान किसी कर्मचारी द्वारा मनमाने ढंग से अथवा बिना किसी अभिलेखीय आधार के निर्गत नहीं किया गया है। उक्त वाहन से संबंधित एक गंभीर सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसके संबंध में कांटी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में वाहन के तेज एवं खतरनाक ढंग से चलाए जाने तथा दुर्घटना में व्यक्ति की मृत्यु एवं अन्य व्यक्तियों के घायल होने का उल्लेख है। उक्त दुर्घटना से संबंधित FIR एवं उपलब्ध दुर्घटना संबंधी अभिलेखों/IRAD-eDAR सूचना के परीक्षण के क्रम में परिवहन विभाग के प्रवर्तन पदाधिकारियों द्वारा मोटर वाहन अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की गई। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि दुर्घटना के बाद वाहन के क्षतिग्रस्त अवस्था में होने का तथ्य अपने-आप में इस बात का निर्णायक प्रमाण नहीं है कि दुर्घटना के समय वाहन किस प्रकार संचालित किया गया था। वर्तमान कार्रवाई दुर्घटना से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की गई है, न कि जून माह में उक्त वाहन को सड़क पर चलाते हुए पाए जाने के आधार पर।मीडिया रिपोर्ट में उल्लिखित ₹7,500 की राशि, प्रयुक्त धाराओं, घटना-स्थल एवं ई-चालान में अंकित विवरण का विभागीय अभिलेखों से मिलान किया जा रहा है। यदि किसी तकनीकी/अभिलेखीय त्रुटि की पुष्टि होती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मुजफ्फरपुर से धीरज पराशर की रिपोर्ट










