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पटना हाईकोर्ट का 'फर्जी जज' बन ADTO से 20 लाख की ठगी, जानें पूरा मामला

मुजफ्फरपुर के ADTO कुमार विवेक से पटना हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनकर 20 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने फर्जी पहचान बताकर इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया।

Cyber Fraud in Muzaffarpur ADTO Case
पटना हाईकोर्ट का 'फर्जी जज' बन ADTO से 20 लाख की ठगी- फोटो : news 4 nation AI

बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब उन्होंने न्यायपालिका के नाम पर बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला मुजफ्फरपुर के अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) कुमार विवेक से जुड़ा है, जिनसे पटना हाईकोर्ट का फर्जी जज बनकर 20 लाख रुपये की ठगी की गई है।

न्यायाधीश बनकर किया संपर्क

शिकायत के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 29 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ। जालसाजों ने मोबाइल नंबर 7856907380 से परिवहन पदाधिकारी कुमार विवेक को कॉल किया। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्री राजीव रंजन के रूप में दी। खुद को जज बताते हुए आरोपी ने किसी आवश्यक कार्य के बहाने ट्रांसपोर्टर का नंबर मांगा और बातचीत का सिलसिला शुरू किया।

20 लाख रुपये की बड़ी ठगी

ठगों ने अधिकारी को झांसे में लेने के लिए एक बिचौलिये, उदय शंकर प्रसाद सिंह, का भी सहारा लिया ताकि विश्वास पक्का हो सके। बार-बार यह भरोसा दिलाया गया कि फोन पर स्वयं न्यायाधीश बात कर रहे हैं। इसी दौरान जालसाजों ने चालाकी से कुमार विवेक के नाम पर 20,00,000 रुपये (बीस लाख) का वित्तीय फ्रॉड कर लिया। ठगी को अंजाम देने के बाद से ही आरोपित का मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आ रहा है।

अधिकारी ने दर्ज कराई प्राथमिकी

ठगी का अहसास होने पर अपर जिला परिवहन पदाधिकारी कुमार विवेक ने मुजफ्फरपुर के सदर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं और उन्हें साजिश के तहत निशाना बनाया गया है। उन्होंने पुलिस से कॉल डिटेल्स और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर मामले की गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नाम का दुरुपयोग कर एक वरिष्ठ अधिकारी को ठगना राज्य की सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है। हाल के दिनों में "डिजिटल अरेस्ट" और फर्जी अधिकारी बनकर ठगी के मामलों में तेजी आई है। पुलिस प्रशासन ने लोगों और अधिकारियों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास करने से पहले संबंधित विभाग से सत्यापन जरूर करें ताकि ऐसे साइबर फ्रॉड से बचा जा सके।

रिपोर्ट - धीरज पराशर