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Bihar Land Mutation: बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज में बड़ा घोटाला? अंचल में नियमों की उड़ी धज्जियां, रिजेक्ट केस किया गया मंजूर, खेल बड़ा है

Bihar Land Mutation: बिहार में दाखिल-खारिज के नियमों को ताक पर रखकर किए गए फैसले ने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है।....

Bochahan Land Row Rejected Mutation Cases Cleared CO Faces H
दाखिल-खारिज का खेल!- फोटो : social Media

Bihar Land Mutation:बिहार में दाखिल-खारिज के नियमों को ताक पर रखकर किए गए फैसले ने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है। मुजफ्फरपुर के बोचहां अंचल में अस्वीकृत दाखिल-खारिज वाद को बिना किसी न्यायिक आदेश के नए अभिलेख पर स्वीकार कर जमीन का दाखिल-खारिज करने के मामले में जिलाधिकारी कुमार गौरव ने सख्त रुख अख्तियार किया है। डीएम ने मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी राजा कुमार और तत्कालीन राजस्व कर्मचारी संजीव कुमार से स्पष्टीकरण तलब किया है।

मामला बोचहां अंचल के दाखिल-खारिज वाद संख्या 5984/2022-23 और 5985/2022-23 समेत तीन मामलों से जुड़ा है। बताया गया है कि इन मामलों की शिकायत 13 जुलाई को आम जनता संवाद कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी से की गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की।

जांच में जो तस्वीर सामने आई, उसने राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों दाखिल-खारिज वाद पहले ही अस्वीकृत किए जा चुके थे, क्योंकि संबंधित जमीन को लेकर न्यायालय में मामला लंबित था। यानी जब मामला अदालत में विचाराधीन था, तब दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से इनकार किया गया था।लेकिन इसके बाद कथित तौर पर बिना किसी न्यायिक आदेश के उन्हीं मामलों को नए अभिलेख पर फिर से स्वीकार कर लिया गया और दाखिल-खारिज की कार्रवाई पूरी कर दी गई। प्रशासन ने इसे नियमों के खिलाफ माना है। डीएम ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस तरह अस्वीकृत वाद को नए अभिलेख के आधार पर स्वीकार करना बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 के निर्धारित प्रावधानों के विपरीत है।

डीएम ने तत्कालीन सीओ और राजस्व कर्मचारी को पत्र प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि तय अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मामले की रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।

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यह मामला महज कागजी प्रक्रिया की चूक नहीं, बल्कि भूमि संबंधी प्रशासनिक फैसलों की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या सफाई दी जाती है और जांच के बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।