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Bihar News : रक्सौल नगर परिषद के मुख्य पार्षद की गयी कुर्सी, तत्कालीन ईओ पर कार्रवाई का जारी हुआ आदेश, जानिये क्या है पूरा मामला

Bihar News : रक्सौल नगर परिषद के मुख्य पार्षद की गयी कुर्सी,

MOTIHARI : मोतीहारी में राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई किया है। भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्ति और बोर्ड की बैठक समय पर नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग ने रक्सौल नगर परिषद के मुख्य पार्षद को अयोग्य घोषित किया है। वही तत्कालीन ईओ अनुभूति श्रीवास्तव पर प्रपत्र क गठित करने का मोतीहारी डीएम को निर्देश दिया है। राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई से मनमानी व भ्रष्टाचार करने वाले जनप्रतिधि व अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। सबसे रोचक तत्कालीन ईओ का रक्सौल से ट्रांसफर के बाद आर्थिक अपराध इकाई के रेड उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और गबन का खुलासा हुआ था।

राज्य निर्वाचन आयोग ने रक्सौल नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता, अवैध नियुक्ति और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े चर्चित मामले में तत्कालीन मुख्य पार्षद धुरपति देवी को पद धारण करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग ने तत्कालीन ईओ अनुभूति श्रीवास्तव के विरुद्ध भी "प्रपत्र-क" गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश मोतीहारी के डीएम सह निर्वाचन पदाधिकारी को दिया है।

इसकी प्रति नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजा गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद द्वारा जारी 11 पृष्ठीय आदेश में कहा गया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18(1) (1) सह-पठित धारा 18 (2) के तहत धुरपति देवी को तत्काल प्रभाव से नगरपालिका के किसी पद के लिए अयोग्य घोषित किया जाता है। आदेश की प्रति नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को भी भेजी गई है। आयोग ने जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर पाया कि मुख्य पार्षद ने अनिवार्य मासिक बोर्ड बैठकों का आयोजन नहीं किया, विभागीय रोक के बावजूद ग्रुप-सी और डी में नियुक्तियां कीं तथा बिना बोर्ड अनुमोदन और बजट प्राक्कलन के करोड़ों रुपये की सामग्री खरीद में अनियमितता बरती। 

उल्लेखनीय है कि आर्थिक अपराध इकाई पहले ही उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और गबन के मामलों में कार्रवाई में जुटी है। गौरतलब है कि नगर विकास एवं आवास विभाग ने 5 अगस्त 2025 में ही धुरपति देवी को भ्रष्टाचार के प्रमाणित आरोपों के आधार पर बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 के धारा 25 (5) के तहत पदमुक्त कर दिया था। विभाग के उस आदेश को चुनौती देते हुए तत्कालीन मुख्य पार्षद धुरपति देवी ने आयोग का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर यह फैसला आया है।

NSIT
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हिमांशु की रिपोर्ट