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Bihar News : मोतिहारी में केसरिया CHC प्रभारी का बड़ा फर्जीवाड़ा, दबाव में बदली इंज्युरी रिपोर्ट, डॉक्टर और प्रमुख पति समेत 6 पर दर्ज हुआ FIR

Bihar News : मोतिहारी के सरकारी अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. जहाँ दवाब में इंज्युरी रिपोर्ट बदल दी गयी है. इस मामले में आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है.......पढ़िए आगे

Bihar News : मोतिहारी में केसरिया CHC प्रभारी का बड़ा फर्जीव
अस्पताल का फर्जीवाड़ा - फोटो : HIMANSHU

MOTIHARI : बिहार के मोतिहारी जिले स्थित केसरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ के तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी डॉ. दशरथ ठाकुर ने एक ही जख्मी व्यक्ति की दो अलग-अलग इंज्युरी रिपोर्ट तैयार कर दी। पहली रिपोर्ट में चोट को 'साधारण' बताया गया, जबकि दूसरी रिपोर्ट में उसे 'जानलेवा और गंभीर' (ग्रिवियस एंड डेंजरस टू लाइफ) दर्शाया गया। इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित इमरान ने सिविल सर्जन से इसकी शिकायत की और तीन साल की लंबी लड़ाई के बाद जांच टीम ने सच्चाई उजागर की।

मामला नवंबर 2023 का है, जब बैरिया निवासी सरफराज अहमद खान एक विवाद में घायल हुए थे। इस घटना में सरफराज के पिता ने मुखिया मोहिबुल्लाह उर्फ मुन्ना और इमरान समेत 16 लोगों को आरोपी बनाया था। आरोपियों को फंसाने के लिए गहरी साजिश रची गई और तत्कालीन सीएचसी प्रभारी डॉ. दशरथ ठाकुर पर दबाव बनाकर मेडिकल रिपोर्ट बदलवा दी गई। जांच टीम के सामने डॉक्टर का बयान सुनकर हर कोई दंग रह गया; उन्होंने स्वीकार किया कि रसूखदारों के दबाव में आकर उन्होंने दूसरी फर्जी रिपोर्ट तैयार की थी। इतना ही नहीं, पुलिस को गुमराह करने के लिए एक इंज्युरी रिपोर्ट थाना प्रभारी को तो दूसरी केस के आईओ (जांच अधिकारी) को सौंपी गई।

इस सुनियोजित जालसाजी में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि निजी जांच घर के संचालक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के परिजनों की मिलीभगत भी सामने आई है। आरोप है कि 'मां वैष्णव जांच घर' के संचालक दीपेंद्र कुमार ने एक्सरे प्लेट के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी साक्ष्य उपलब्ध कराए ताकि साधारण चोट को गंभीर दिखाया जा सके। इस पूरे खेल में प्रमुख पति नाज अहमद खान की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब तत्कालीन सीएचसी प्रभारी, जांच घर संचालक और प्रमुख पति सहित आधा दर्जन लोगों के विरुद्ध केसरिया थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। एक ही केस में दो-दो अलग-अलग रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई करने और साक्ष्यों की अनदेखी करने को लेकर थाना के अधिकारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब उन पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिर सकती है जिन्होंने इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दिया। थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि इमरान के आवेदन पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

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तीन साल तक न्याय के लिए दर-दर भटकने वाले इमरान की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सरकारी पद पर बैठे डॉक्टर द्वारा दबाव में आकर रिपोर्ट बदलने की बात स्वीकार करना व्यवस्था की लाचारी को दर्शाता है। फिलहाल, पुलिस दोषियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैसे रसूखदार लोग स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के साथ मिलकर निर्दोषों को फंसाने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी करते हैं। 

हिमांशु की रिपोर्ट