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Bihar News : बड़हिया में नाले का गंदा पानी जमीन में उतारने की योजना पर रोक, News4Nation की पड़ताल के बाद हरकत में आया प्रशासन

Bihar News : लखीसराय के बड़हिया में नाले के गंदे पानी को जमीन में उतारने की योजना पर रोक लगा दी गयी है. news4nation की पड़ताल के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया है......पढ़िए आगे

Bihar News : बड़हिया में नाले का गंदा पानी जमीन में उतारने की
योजना पर रोक - फोटो : KAMLESH

LAKHISARAI : नगर परिषद बड़हिया के वार्ड संख्या 11 में नाले के गंदे पानी को रिचार्ज पिट और बोरिंग के माध्यम से जमीन में प्रवाहित करने की प्रस्तावित योजना ने जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि फिलहाल नाले का पानी जमीन में नहीं डाला जा रहा था, लेकिन इसकी तैयारी किए जाने से भू-जल प्रदूषण की आशंका गहराने लगी थी। इस योजना के तहत तीन चैम्बर बनाए गए हैं, जिनमें ईंट के टुकड़े और गिट्टी/कंक्रीट डाली गई है, जबकि अंतिम चरण में बोरिंग के माध्यम से नाले का गंदा पानी जमीन के अंदर ले जाने की तैयारी की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया देखने में वर्षा जल संचयन जैसी प्रतीत होती है, जबकि नाले का पानी अत्यधिक प्रदूषित होता है, जिसमें मानव मल, हानिकारक बैक्टीरिया, केमिकल, डिटर्जेंट एवं अन्य विषैले तत्व मौजूद रहते हैं। स्थानीय लोगों ने इंदौर की उस घटना का हवाला देते हुए चिंता जताई है, जहां जहरीला पानी पीने से लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की योजना बिना वैज्ञानिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लागू की गई, तो बड़हिया में भी गंभीर जनस्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है। इस संबंध में नागरिकों ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के कार्यपालक अभियंता तथा बड़हिया नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की है।

News4Nation की पड़ताल के बाद जागा प्रशासन

जब News4Nation के रिपोर्टर ने इस मामले को लेकर बड़हिया नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी रवि कुमार से सीधी बात की, तो उन्होंने स्वयं स्थल पर पहुंचकर पूरी योजना का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद रवि कुमार ने तत्काल इस कार्य पर रोक लगा दी। साथ ही लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को पत्र लिखकर इस पूरी योजना पर तकनीकी मंतव्य और स्पष्ट राय मांगी गई है।

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PHED का स्पष्ट और कड़ा रुख

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के कार्यपालक अभियंता रूपेश कुमार ने News4Nation से बातचीत में स्पष्ट कहा कि गंदे नाले का पानी किसी भी परिस्थिति में बोरवेल या रिचार्ज पिट के माध्यम से जमीन में नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा कि नाले का पानी अत्यधिक प्रदूषित होता है, जिससे भू-जल पूरी तरह दूषित हो सकता है। इसका सीधा असर आसपास के हैंडपंप, चापाकल और बोरिंग के पानी पर पड़ता है, जिसे लोग पीने में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कार्यपालक अभियंता रूपेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की किसी योजना को लेकर PHED की ओर से नगर परिषद को कोई तकनीकी स्वीकृति या सहमति नहीं दी गई है। बिना वैज्ञानिक उपचार (STP) के इस तरह की व्यवस्था पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है।

कानून के दायरे में मामला

विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदत्त “स्वच्छ पेयजल का अधिकार” (अनुच्छेद 21), जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों के तहत गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। फिलहाल प्रशासन द्वारा कार्य पर रोक लगा दी गई है, लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले कि जांच कराई जाए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में भू-जल और जनस्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का प्रयोग न हो।

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कमलेश की रिपोर्ट