LATEST NEWS

  • Bihar News : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए फिर से खुला, नए पैकेज, हाथी सफारी और हेलीकॉप्टर सेवा से ईको-टूरिज्म को लगेंगे पंख
  • Bihar News : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए फिर से खुला, नए पैकेज, हाथी सफारी और हेलीकॉप्टर

  • Kolkata Durga Puja Stampede: चोरबागान पूजा पंडाल में मची भगदड़, कई लोग घायल, सप्तमी के दिन हादसा
  • Kolkata Durga Puja Stampede: चोरबागान पूजा पंडाल में मची भगदड़, कई लोग घायल, सप्तमी के दिन हादसा

  • Bihar News : भाजपा विधायक के करीबी बताए जा रहे शैलेश मिश्रा को गुजरात पुलिस ने बक्सर से उठाया, इस मामले में हुई गिरफ़्तारी
  • Bihar News : भाजपा विधायक के करीबी बताए जा रहे शैलेश मिश्रा को गुजरात पुलिस ने बक्सर से

  • दादा की दुर्दशा..छोटू सिंह का निष्काशन और डॉ एनपी सिंह का ट्रांसफर...जदयू पर जमकर बरसे पूर्व सांसद आनंद मोहन, कहा राजपूत समाज का हो रहा क्रमबद्ध कत्लेआम
  • दादा की दुर्दशा..छोटू सिंह का निष्काशन और डॉ एनपी सिंह का ट्रांसफर...जदयू पर जमकर बरसे पूर्व सांसद आनंद

  • Bihar Crime : वैशाली में प्रेमिका के पिता और स्कूल गार्ड ने रची शिवम की हत्या की साजिश, पुलिस ने दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार
  • Bihar Crime : वैशाली में प्रेमिका के पिता और स्कूल गार्ड ने रची शिवम की हत्या की साजिश,

खगड़िया के सपूत ने रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास, ऑस्ट्रेलिया के NIFFA 2026 में ख्वाबीदा बनी बेस्ट शॉर्ट फ़िल्म, अभिनेता सुमन शेखर ने बढ़ाया बिहार का मान

Bihar Short Film: बिहार की धरती एक बार फिर अपनी रचनात्मक प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है।

Bihar Short Film
खगड़िया से ऑस्ट्रेलिया तक गूंजा नाम!- फोटो : reporter

Khagaria: बिहार की धरती एक बार फिर अपनी रचनात्मक प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है। खगड़िया के युवा अभिनेता सुमन शेखर अभिनीत और निर्देशक जोड़ी प्रशांत बेयबार एवं विशाल तिवारी के निर्देशन में बनी लघु फ़िल्म ‘ख्वाबीदा’ ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित NIFFA 2026 (National Indian Film Festival of Australia) में बेस्ट शॉर्ट फ़िल्म का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतकर भारत और विशेष रूप से बिहार का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि छोटे शहरों की प्रतिभाएं अब वैश्विक सिनेमा के सबसे बड़े मंचों पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा रही हैं।

फ़िल्म महोत्सव की निर्णायक समिति ने अपने फैसले में कहा कि ‘ख्वाबीदा’ का लेखन बेहद प्रभावशाली, संवेदनशील और दर्शकों को अंत तक बांधे रखने वाला है। ज्यूरी ने फ़िल्म के कलाकारों के अभिनय की भी खुलकर सराहना की। विशेष रूप से अभिनेत्री नम्रता वर्श्नेय और अभिनेता सुमन शेखर के अभिनय को असाधारण बताते हुए कहा गया कि दोनों कलाकारों ने अपने किरदारों को इतनी सहजता और गहराई से निभाया कि दर्शक कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ गए। वहीं निर्देशक प्रशांत बेयबार और विशाल तिवारी की प्रस्तुति को भी सराहा गया। ज्यूरी का मानना था कि फ़िल्म बिना किसी अनावश्यक संवाद या व्याख्या के अपने संदेश को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों तक पहुंचाने में पूरी तरह सफल रही।

खगड़िया के साहित्यकार स्वर्गीय कैलाश झा किंकर के छोटे पुत्र सुमन शेखर पिछले एक दशक से साहित्य, रंगमंच और सिनेमा की दुनिया में सक्रिय हैं। अभिनय के प्रति जुनून ने उन्हें खगड़िया से दिल्ली और फिर मायानगरी मुंबई तक पहुंचाया। रंगमंच की मजबूत पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने अपने अभिनय कौशल को लगातार निखारा और आज वे हिंदी फ़िल्मों तथा थिएटर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

सुमन शेखर की यह उपलब्धि किसी एक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि लगातार मेहनत और समर्पण का परिणाम है। इससे पहले उनकी फ़िल्म ‘The Saddist’ की जर्मनी में स्क्रीनिंग हो चुकी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया था। वहीं हाल ही में नेपाल इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में फ़ीचर फ़िल्म ‘Life Time Death’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के सम्मान से नवाज़ा गया था। अब ‘ख्वाबीदा’ की इस नई सफलता ने उनके करियर में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है।

NSIT
Nsmch

फ़िल्म को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान केवल पूरी टीम की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि खगड़िया, अंग और मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक विरासत की वैश्विक पहचान भी है। इस उपलब्धि पर स्थानीय साहित्यकारों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने खुशी जताते हुए सुमन शेखर और पूरी फ़िल्म टीम को बधाई दी है। उनका कहना है कि यह सम्मान बिहार की नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा बनेगा और प्रदेश की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी आगे बढ़ने का हौसला देगा।

‘ख्वाबीदा’ की यह कामयाबी इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी महानगर की मोहताज नहीं होती। यदि समर्पण, मेहनत और सृजनात्मक दृष्टि हो तो खगड़िया जैसे छोटे शहर से निकला कलाकार भी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फ़िल्म मंचों पर अपनी चमक बिखेर सकता है।

रिपोेर्ट- अमित कुमार