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दो हाथ नहीं, हौसलों से लिख रही तकदीर, पैरों से अक्षर गढ़ रही लक्ष्मी, बनना चाहती है शिक्षिका

Bihar Girl Writing With Feet: कहते हैं किस्मत की लकीरें हाथों में होती हैं, लेकिन मासूम लक्ष्मी ने इस कहावत को ही चुनौती दे दी है।

No Hands No Limits Katihar Girl Writes Her Dream With Her Fe
हौसलों से तकदीर लेख- फोटो : reporter

Bihar Girl Writing With Feet: कहते हैं कि इंसान की तकदीर हाथों की लकीरों में लिखी होती है, लेकिन कटिहार की नन्ही लक्ष्मी ने इस कहावत को ही चुनौती दे दी है। जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग कक्षा चार की छात्रा लक्ष्मी अपने पैरों को ही कलम बनाकर अपनी किस्मत लिखने में जुटी है। उसके हौसले और जज्बे को देखकर आंखें नम भी होती हैं और दिल गर्व से भर उठता है।

तस्वीर कटिहार के हसनगंज प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतौरिया की है, जहां लक्ष्मी अपने पैरों से लिखकर पढ़ाई की राह पर आगे बढ़ रही है। जिंदगी ने उसे जन्म से ही मुश्किल इम्तिहान दिया, मगर उसने हार मानने के बजाय इल्म को अपना हथियार बना लिया। उसका सपना बड़ा है वह पढ़-लिखकर शिक्षिका बनना चाहती है।

लक्ष्मी के माता-पिता भी सलाम के हकदार हैं। मजदूरी कर तीन बेटियों और एक बेटे की परवरिश करने वाले इस दंपती ने बेटी की दिव्यांगता को कभी उसकी कमजोरी नहीं बनने दिया। बताया जाता है कि जन्म के बाद कुछ लोगों ने बच्ची को छोड़ देने तक की सलाह दी थी, लेकिन मां-बाप ने उसे बोझ नहीं, अपनी ‘लक्ष्मी’ माना और प्यार से उसका नाम लक्ष्मी रखा।

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खुद अनपढ़ होने के बावजूद माता-पिता रोज उसे विद्यालय तक पहुंचाते हैं, ताकि अक्षर ज्ञान के सहारे बेटी अपनी जिंदगी की नई इबारत लिख सके। हालांकि अब तक सरकारी मदद नहीं मिलने का मलाल परिवार को जरूर है, लेकिन विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं का सहयोग लक्ष्मी के हौसले को लगातार मजबूत कर रहा है।

लक्ष्मी सिर्फ एक बच्ची नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए मिसाल है जो मजबूरियों या सामाजिक सोच के कारण बेटियों को शिक्षा से दूर कर देते हैं। जरूरत है कि सरकार और समाज आगे आए और इस होनहार बच्ची को हरसंभव सहायता दे। क्योंकि लक्ष्मी हाथों से नहीं, हौसलों से अपनी तकदीर लिख रही है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह