LATEST NEWS

  • Naubatpur Traffic
  • Naubatpur Traffic: पटना के नौबतपुर में ट्रैफिक जाम पर उठे सवाल, CCTV फुटेज जांचने की मांग

  • Gaya Police News
  • Gaya Police News: गया में गांधी नगर जमीन विवाद में एसएसपी की बड़ी कार्रवाई, ADG की खबरों

  •  credit card
  • credit card: दिवाली पर HDFC, SBI, ICICI और Axis बैंक के क्रेडिट कार्ड से खरीदारी पर छूट,

  • Kylie jenner
  • Kylie jenner: 4410 हीरे और 1,000 घंटे की मेहनत, जानें काइली जेनर की फैंटेसी ब्रा की खासियत

  • IT companies hiring
  • IT companies hiring: IT सेक्टर में लौटी भर्ती की रफ्तार, 5 बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ी

सेहत पर संकट! क्वालिटी टेस्ट में फेल हुईं 111 दवाइयां, जानिए अब क्या होगा

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की हालिया रिपोर्ट में 111 दवाइयां गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरीं। इनमें से दो दवाइयों का कोई उत्पादक नहीं मिला। नकली दवाइयों के उत्पादन और बिक्री को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

क्वालिटी फेल दवाइयां

नवंबर 2024 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में 111 दवाइयां गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गईं। इनमें दो दवाइयां ऐसी पाई गईं जिनका कोई उत्पादक नहीं है। नकली दवाइयों की पहचान बिहार और गाजियाबाद में बड़े स्तर पर हुई है। इस गंभीर मामले ने देशभर में स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन दवाइयों को बाजार से हटाने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

कैसे हुई जांच?

CDSCO ने देशभर में दवा दुकानों से नमूने इकट्ठा किए, इनमें से 41 नमूनों की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में और 70 की जांच राज्य प्रयोगशालाओं में की गई। ये दवाइयां गैस, बुखार और सांस से संबंधित बीमारियों के लिए उपयोग की जाती थीं। नकली पाई गई दो प्रमुख दवाइयां हैं:

1. पैन-40 (गैस की दवा) - बैच नंबर: 23443074 (बिहार में बिक्री)।

2. ऑगमेंटिन 625 डीयूओ (एंटीबायोटिक) - बैच नंबर: 824D054 (गाजियाबाद में बिक्री)।

सरकार की सख्त कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन नकली दवाइयों को बाजार से हटाने और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मंत्रालय के अनुसार, नकली दवाइयों के उत्पादन और बिक्री में दोषियों को 10 साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है।

पहले भी हुई थी ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब दवाइयां गुणवत्ता मानकों पर फेल हुई हैं। इससे पहले भी पैरासिटामोल जैसी आम दवाइयां गुणवत्ता टेस्ट में असफल हुई थीं।

NSIT
Nsmch

निष्कर्ष

नकली दवाइयों की रोकथाम के लिए जागरूकता और सख्त कानून जरूरी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का यह कदम एक अहम शुरुआत है, लेकिन इसे प्रभावी बनाने के लिए जनता का सहयोग भी जरूरी है।