LATEST NEWS

  • Muzaffarpur SSP Kantesh Kumar Mishra review meeting
  • MLC चुनाव व त्योहारों को लेकर मुजफ्फरपुर SSP की हाई-लेवल बैठक, सुरक्षा और ट्रैफिक का बना मास्टर प्लान!

  • Bihar News : फर्जी कागजात पर केवल ठेकेदार नहीं, दोषी अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज, बिहार सरकार के मंत्री का बड़ा ऐलान
  • Bihar News : फर्जी कागजात पर केवल ठेकेदार नहीं, दोषी अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज, बिहार सरकार के

  • Public beat miscreants Muzaffarpur
  • मुजफ्फरपुर में छात्रा से बदसलूकी पड़ी भारी: बाइक सवार युवकों की ग्रामीणों ने की पिटाई,पुलिस हिरासत में पूछताछ

  • Bihar News :  छपरा नगर निगम में मचा हड़कंप, नगर आयुक्त को रिश्वत की पेशकश के आरोप में टैक्स कलेक्टर हुआ गिरफ्तार
  • Bihar News : छपरा नगर निगम में मचा हड़कंप, नगर आयुक्त को रिश्वत की पेशकश के आरोप

  • Narkatiaganj school midday meal issue
  • नरकटियागंज में घटिया मिड-डे मील पर फूटा छात्रों का गुस्सा, मौके पर पहुंची पुलिस, BEO ने दिए जांच

Bihar Police: बिहार का एकमात्र थाना जहां रक्षाबंधन पर बदल जाता है रंग-ढंग, पीला धोती पहनते हैं थानेदार, 1865 की दर्दनाक कहानी से जुड़ी परंपरा

Bihar Police:जिस परिसर में आम दिनों में खाकी वर्दी और पुलिसिया रौब दिखाई देता है, वहां इस दिन पीली धोती, पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और प्रसाद की खुशबू माहौल को आध्यात्मिक रंग दे देती है।...

Bihar Police: बिहार का एकमात्र थाना जहां रक्षाबंधन पर बदल जा

Bihar Police:जिस परिसर में आम दिनों में खाकी वर्दी और पुलिसिया रौब दिखाई देता है, वहां इस दिन पीली धोती, पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और प्रसाद की खुशबू माहौल को आध्यात्मिक रंग दे देती है। थानेदार भी खाकी वर्दी छोड़कर पीली धोती धारण करते हैं और पूजा में यजमान की भूमिका निभाते हैं।बिहार के गोपालगंज जिले का कुचायकोट थाना सावन पूर्णिमा के दिन कानून-व्यवस्था के अपने रोजमर्रा के अंदाज से बिल्कुल जुदा नजर आता है। 

कुचायकोट थाने में सावन पूर्णिमा पर होने वाली यह सती पूजा कोई नई रस्म नहीं, बल्कि स्थानीय मान्यता के मुताबिक करीब 160 साल पुरानी परंपरा है। ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों का दावा है कि इसकी शुरुआत अंग्रेजों के दौर में, वर्ष 1865 के आसपास हुई थी। हर साल रक्षाबंधन यानी सावन पूर्णिमा के दिन थाना परिसर में विधि-विधान से पूजा होती है और बड़ी तादाद में स्थानीय लोग इसमें शरीक होते हैं।

Diarch GO

एक दर्दनाक कहानी से जुड़ी है परंपरा

इस पूजा के पीछे एक पुरानी और भावुक कहानी बताई जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1865 में कुचायकोट निवासी कवल यादव की अचानक मौत हो गई थी। गांव के लोग अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए और चिता तैयार कर शव को उस पर रख दिया गया। लेकिन काफी कोशिश के बावजूद चिता में आग नहीं लगी।बताया जाता है कि जब कवल यादव की पत्नी को इसकी खबर मिली तो वह चिता स्थल पर पहुंचीं। स्थानीय मान्यता के मुताबिक उन्होंने पति के शव को अपनी गोद में लिया और चिता पर बैठ गईं। इसके बाद चिता में अपने आप आग लग गई। इसी घटना को स्थानीय लोग सती माता की कथा से जोड़कर देखते हैं।मान्यता है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, बाद में वहां मंदिर और थाना परिसर का निर्माण हुआ। हालांकि यह कथा स्थानीय आस्था और परंपरा पर आधारित है, इसके ऐतिहासिक तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है।

थानेदार बनते हैं यजमान, पुलिसकर्मी निभाते हैं रस्म

सावन पूर्णिमा पर थाना परिसर में पूजा की तैयारियां पहले से शुरू हो जाती हैं। पुलिसकर्मी ड्यूटी के साथ पूजा की व्यवस्था भी संभालते हैं। ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। खास बात यह है कि उस दिन कुचायकोट थाने में जो भी थाना प्रभारी तैनात रहता है, वह परंपरा के मुताबिक पीली धोती पहनकर पूजा में यजमान बनता है।

NSIT
Nsmch

पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा जाता है और भंडारे का आयोजन भी होता है। दूर-दराज से लोग अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सती माता से सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है।पुलिसकर्मियों के मुताबिक यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि थाना और ग्रामीणों के बीच जुड़ाव का भी अवसर है। कृष्णा यादव बताते हैं कि थाना स्टाफ और ग्रामीण मिलकर पूजा संपन्न कराते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां वर्ष 1865 से सती माता की पूजा की परंपरा चली आ रही है। हर सावन पूर्णिमा पर यह आयोजन धूमधाम से होता है।अंधविश्वास हो या आस्था, कुचायकोट थाने की यह परंपरा आज भी कायम है। खाकी की सख्ती के बीच पीली धोती और पूजा का यह दृश्य बिहार की लोक-आस्था और पुरानी परंपराओं की एक अनोखी तस्वीर पेश करता है।