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डुमरिया घाट पुल पर मरम्मत कार्य शुरू, नए पुल के निर्माण को लेकर सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन का बड़ा बयान

ऐतिहासिक डुमरिया घाट पुल पर मरम्मत कार्य के कारण सिंगल लेन व्यवस्था लागू कर दी गई है। इस बीच, पुल के निर्माण में हो रही देरी और एनएचएआई (NHAI) की नई 'स्टील गर्डर' तकनीक को लेकर स्थानीय सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने पूरी स्थिति स्पष्ट की है।

MP Alok Kumar Suman on Dumaria Ghat Bridge Gopalganj
डुमरिया घाट पुल मरम्मत पर गोपालगंज MPआलोक कुमार सुमन बोले - फोटो : Reporter

गोपालगंज के ऐतिहासिक डुमरिया घाट पुल पर मरम्मत कार्य शुरू होने के कारण यातायात के लिए सिंगल लेन व्यवस्था लागू कर दी गई है। इस बीच, पुल की स्थिति और इसके समानांतर बनने वाले नए पुल के निर्माण में हुई देरी को लेकर स्थानीय सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि नए पुल के निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उम्मीद है कि इस बार मानसून (बारिश) का मौसम बीतने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आएगी।

50 साल पुराने पुल के समानांतर नए पुल की जरूरत

गंडक नदी पर साल 1974 में बना यह डुमरिया घाट पुल करीब 800 मीटर लंबा है। यह पुल पिछले कई दशकों से उत्तर बिहार को पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण सहित कई अन्य जिलों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण लाइफलाइन मार्ग रहा है। चूंकि इस ऐतिहासिक पुल की उम्र अब काफी अधिक हो चुकी है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से इसके समानांतर एक नए पुल का निर्माण शुरू कराया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से काम की रफ्तार धीमी पड़ गई थी।

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टेंडर की प्रक्रिया और केंद्रीय स्तर पर प्रयास

सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने बताया कि साल 2019 में चुनाव जीतने के बाद से ही उन्होंने इस नए पुल के निर्माण को अपनी प्राथमिकताओं में रखा था। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर कई बार टेंडर निकाले गए, लेकिन किसी भी बड़ी निर्माण एजेंसी ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से मुलाकात कर केंद्रीय स्तर पर टेंडर जारी करने का विशेष अनुरोध किया, जिसके बाद आखिरकार एक सक्षम एजेंसी का चयन हुआ और काम धरातल पर शुरू हो सका।

तकनीकी बदलाव और स्टील गर्डर तकनीक को मंजूरी

निर्माण कार्य के दौरान पुल के स्पैन के डिजाइन को लेकर एक नई तकनीकी समस्या सामने आई थी। विशेषज्ञों और इंजीनियरों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह तय किया गया कि यहाँ सीमेंट-कंक्रीट की जगह 'स्टील गर्डर' तकनीक का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित और उपयुक्त रहेगा। सांसद के लगातार पत्राचार और एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के बाद अब सरकार से स्टील गर्डर तकनीक को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे बरसात खत्म होते ही बिना किसी बाधा के पुल का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।

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रिपोर्ट - नमो नारायण मिश्र