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Bihar News : गयाजी का अनोखा हंसराज पर्वत, बारिश के साथ बरसते हैं अनमोल रत्न, बदल रही हसरा गांव के लोगों की तकदीर

Bihar News : गयाजी का हंसराज पर्वत आज कई गांवों के लिए वरदान साबित हो रहा है। बारिश की हर बूंद के साथ यहां खुशहाली और आर्थिक समृद्धि की नई दास्तान लिखी जा रही है......पढ़िए आगे

Bihar News : गयाजी का अनोखा हंसराज पर्वत, बारिश के साथ बरसते
पहाड़ से बदल रही किस्मत - फोटो : MANOJ

GAYAJI : गयाजी का हंसराज पर्वत अनोखा पहाड़ जिला मुख्यालय से करीब 35-40 किलोमीटर दूर वजीरगंज प्रखंड के हसर गांव के हंसराज पर्वत की गोद में बसा है। संभवत हंसराज पर्वत के नाम पर ही इस गांव का नाम हसर पड़ा। हंसराज पर्वत को लोग ग्रामीण अनोखा पर्वत मानते हैं। हंसराज पर्वत की धार्मिक मान्यता के साथ-साथ अनमोल रतन से जुड़ी कई कहानियां है जो जमीनी तौर पर हकीकत में भी दिखती है। हंसराज पर्वत पर भगवान भोलेनाथ का अद्भुत शिवलिंग है जो अब आप रूपी पर प्रकट हुआ। इसके प्रति अगाध आस्था हजारों लाखों लोगों की जुड़ी हुई है। इस पर्वत से निकलने वाले अनमोल रतन इस गांव के लोगों समेत आसपास के गांव के लोगों की तकदीर भी बदल रही है। ग्रामीण इसे भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद बताते हैं। अनमोल रतन पहाड़ से निकलने के कारण इसे अनोखा अद्भुत चमत्कारिक पहाड़ भी कहा जाता है। 

मानसून आते ही बदलने लगती है तकदीर 

खसरा गांव विशेष कर हसर गांव के लोगों को मानसून का बेसब्री से इंतजार रहता है।  मानसून आते ही यहां के लोगों के चेहरे खिल उठाते हैं। दरअसल हंसराज पर्वत बारिश के मौसम में लोगों की तकदीर बदलने का पैमाना बन जाता है।  ऐसा इसलिए है क्योंकि जब बारिश होती है तो हंसराज पर्वत से अनमोल रतन बारिश के पानी के साथ गांव में बहकर चले आते हैं। इसमें मनिया को प्राकृतिक माना जाता है। 

लखपति बना रहा यह पहाड़

इस हंसराज पहाड़ की देन है कि आज यहां के सैकड़ो लोग लखपति बन चुके हैं। खसरा गांव करीब डेढ़ सौ घरों की बस्ती वाला गांव है और 1000 के करीब यहाँ की आबादी है। इस गांव में पहले जहां मकान कच्चे होते थे। अब तक पक्के हो गए। इसका मुख्य कारण है कि बरसात और हंसराज पर्वत यहां खुशहाली का पैगाम बनता रहा है।  धीरे-धीरे इसके कारण लोगों की तक़दीर बनती रहती है। बारिश के मौसम के साथ पहाड़ से जब अनमोल रतन के रूप में मनिया, मूंगा, मोती बहकर आते हैं तो जिन ग्रामीणों को यह मिल जाता है इसका नसीब बदलते देर नहीं लगती। कम से कम लखपति जरूर हो जाते हैं। मूंगा से कोई मकान बना रहा है तो कोई बाइक खरीद रहा तो कोई और संसाधनों को की पूर्ति कर रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि या गरीबों की बस्ती धीरे-धीरे खुशहाल होती जा रही है। पहले कम कीमत पर ही मनिया हाइब्रिड आदि में बेच दिए जाते थे। किंतु जैसे-जैसे धीरे-धीरे लोग जागरूक हुए। वैसे-वैसे  अब तो 5 लाख तक में यह अनमोल रतन बिकने लगे हैं। 

राजस्थान से भी पहुंच रहे खरीदार

ग्रामीणों का कहना है कि हंसराज पहाड़ से निकलने वाले अनमोल रतन को खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। गया, राजगीर और बोधगया के अलावे राजस्थान से भी लोग आते हैं। कई ऐसे हैं जो बारिश के मौसम में रोजाना इसी इलाके में आते हैं और रत्न की खरीदारी का प्रयास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां विदेशी भी पहुंच जाते हैं ताकि उन्हें यहां मिलने वाला रत्न प्राप्त हो सके। इसके लिए अब तो मुंह मांगी कीमत भी देने को तैयार रहते हैं। 

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पहले हजारों में ही बेच देते थे ग्रामीण अब लाखों में होती है बिक्री

पहले ग्रामीण जानकारी के अभाव में रत्नों को हजारों में ही बेच देते थे। कोई 5000 कोई 10000 तो कोई ₹20000 में इस पहाड़ी से मिलने वाले रन को बेचता था। किंतु अब जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता आई। इसकी डिमांड बढ़ी।  इसे खरीदने वाले बढे। वैसे ही वैसे ही इसकी कीमतों में भी बढ़ोतरी होता चला गया। अब 1 लाख से 5 लाख तक की कीमत में यहां मिलने वाले रत्न बेचे जाते हैं। वैसे जानकार बताते हैं कि यहां मिलने वाले रत्न का एंटीक वैल्यू इतनी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत 50 लाख से 1 करोड़ तक की होती है।  

मनोज की रिपोर्ट