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Success Story: बेबस बाप के दिन की मजदूरी, रात के उम्मीद पर खरा उतरा पूत, तय किया मट्टी के घर से वर्दी तक का सफर, पढ़िए पिता की कुर्बानी, मां की दुआ और बेटे के जुनून की दास्तान

Success Story: जिस धरती पर कभी गोलियों की गूंज का साया था, वहीं से अब सरकारी अफसर निकलकर इलाके की पहचान बदल रहे हैं।....

From Mud House to Uniform Son Fulfills Father Dream
बेबस बाप के दिन की मजदूरी, रात के उम्मीद पर खरा उतरा पूत- फोटो : social Media

Success Story:  जिस धरती पर कभी गोलियों की गूंज का साया था, वहीं से अब सरकारी अफसर निकलकर इलाके की पहचान बदल रहे हैं। कभी खौफ और खामोशी का इलाका कहलाने वाला गयाजी का इमामगंज आज नई उम्मीदों की दस्तक सुन रहा है।उन्हीं में एक नाम है अमित कुमार 2022 बैच के दारोगा, जो इन दिनों भोजपुर में तैनात हैं।

अमित का जन्म गया जिले के देवजरा गांव में हुआ, उस दौर में जब गांव में नक्सलियों का वर्चस्व था। डर और दहशत के माहौल में उनकी परवरिश हुई, मगर माता-पिता ने हालात की गर्दिश को बेटे के इरादों पर हावी नहीं होने दिया। मिट्टी का घर, टूटा चूल्हा और खाली बर्तन गरीबी की तस्वीर साफ थी। कई बार घर में रोटी तक के लाले पड़ जाते थे।

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पिता कमलेश कुमार ने बच्चों की शिक्षा के लिए गांव छोड़ मैगरा बाजार में पनाह ली। उधार लेकर छोटी-सी दुकान खोली। दिन में मजदूरी, रात में उम्मीद इसी जद्दोजहद ने बेटे की राह बनाई। फीस भरने के पैसे नहीं थे, तो बेटी का नाम स्कूल से कटवाना पड़ा, ताकि बेटे की पढ़ाई जारी रह सके। यह कुर्बानी परिवार के दिल में आज भी दर्ज है।

अमित ने ग्रेजुएशन के पहले साल से ही सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। पहली कोशिश में सब-इंस्पेक्टर का रिजल्ट तकनीकी वजह से अटक गया, मगर उन्होंने हौसला नहीं हारा। मेहनत की लौ और तेज कर दी। 2021-22 में किस्मत ने दस्तक दी एक साथ दो कामयाबियां मिलीं। बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर और रेलवे में स्टेशन मास्टर के पद पर चयन हुआ। मगर अमित ने वर्दी को चुना और आज बिहार पुलिस में दारोगा बनकर सेवा दे रहे हैं।

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यह कहानी सिर्फ एक नौकरी की नहीं, बल्कि एक बाप की कुर्बानी, एक मां की दुआ और एक बेटे के जुनून की दास्तान है।गयाजी के इमामगंज की मिट्टी से उठी यह रोशनी अब पूरे इलाके को रौशन कर रही है।