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Bihar News : गयाजी में परंपरा को तोड़ पांच बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, हिंदू रीति-रिवाज से किया अंतिम संस्कार,लोगों ने की जमकर सराहना

Bihar News : गयाजी में पांच बेटियों ने अपने दिवंगत पिता की अर्थी को न केवल कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट पहुंचकर पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार भी किया.........पढ़िए आगे

Bihar News : गयाजी में परंपरा को तोड़ पांच बेटियों ने दिया प
बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज - फोटो : MANOJ

GAYAJI : बिहार के गया में पांच बेटियों ने रूढ़िवादी परंपरा की बेड़ियों से बाहर आकर अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया. पिताजी की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट ले गई और अंतिम संस्कार भी किया. बेटियों द्वारा पिता की अर्थी को कंधा देना और अंतिम संस्कार करना इलाके में चर्चा का विषय बना है. वही, बेटियों ने यह दिखाया, कि वह हर जिम्मेदारी निभाने में बेटों से कम नहीं हैं.

बेटे ही अर्थी को देते हैं कंधा

सामाजिक सोच और मान्यता यही रहती है, कि किसी की अर्थी को चाहे पिता हो या कोई और.. बेटे या पुरुष ही कंधा देते हैं और अंतिम संस्कार करते हैं. किंतु इस रूढ़िवादी परंपरा से बाहर निकल कर इन बेटियों ने अपने हौसले और जिम्मेदारी को दिखाया. बेटियों ने रूढ़िवादी परंपरा की बेङियो को तोड़कर न सिर्फ अपने पिता को कंधा दिया, बल्कि अर्थी को लेकर श्मशान घाट पहुंची और अंतिम संस्कार भी किया. बेटियों का पिता की अर्थी को कंधा देना और अंतिम संस्कार करना जैसी भावुक जिम्मेदारी निभाना एक संदेश है, कि बेटियां हर जिम्मेदारी को निभा सकती है, वे बेटों से कम नहीं है.

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पांच बेटियां थी.. नहीं था कोई पुत्र

जानकारी के अनुसार यह मामला गुरुआ प्रखंड के पहरा पंचायत अंतर्गत बैकटपुर गांव का है. बैकटपुर गांव के चर्चित किसान सीता यादव को कोई पुत्र नहीं था. उनकी पांच बेटियां थी. रविवार की शाम अचानक सीता यादव की तबीयत बिगड़ी और उनका निधन हो गया. सीता यादव की मौत के बाद परिवार में मातम पसर गया. घर में शोक की लहर व्याप्त हो गई. इस पर चर्चा होने लगी, कि सीता यादव की अर्थी को कंधा कौन देगा.

रूढिवादी परंपरा की बेङियो को तोड़कर आगे आई बेटियां

वहीं, इसके बीच रूढ़िवादी परंपरा कि बेटे ही अर्थी दे सकते हैं, उससे बाहर आकर बेटियों ने निर्णय लिया, कि वे अपने पिता की अर्थी को कंधा देंगी और अंतिम संस्कार भी करेंगे. मृत किसान सीता यादव की पांचो बेटियां ममता कुमारी, रजांती देवी, चुन्नी देवी, मुन्नी देवी, सुमंती देवी आगे आई. इसके बाद सभी बेटियों ने मिलकर पिता की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट पहुंची और हिंदू रीति रिवाज के साथ पिता का अंतिम संस्कार किया. बेटियों के द्वारा किए गए अंतिम संस्कार के पल को देखकर लोग भावुक हो गए. कई लोगों की आंखें नम हो गई. वहीं, अब बेटियों की हौसले से भरे इस बड़े कदम को समाज भी अब सराह रहा है.

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बेटियों ने एक मिसाल कायम की है

वही, इस पल को कई लोगों ने सराहा है. बसपा नेता राघवेंद्र नारायण यादव ने कहा है, कि सामाजिक व्यवस्था में बेटे और बेटियों के बीच भेदभाव किया जाता है. किंतु, इन बेटियों ने साबित कर दिया है, कि वे परिवार की किसी भी जिम्मेदारियां को निभाने में पीछे नहीं है. बेटियों ने एक मिसाल कायम की है.

मनोज की रिपोर्ट