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Bihar News : भारतीय सेना को मिले 281 जाबांज अधिकारी, ओटीए गयाजी में पासिंग आउट परेड का हुआ आयोजन, 'अंतिम पग' भर सेना में शामिल हुए कैडेट

Bihar News : भारतीय सेना में 281 अधिकारी शामिल हो गए. ओटीए गयाजी में आयोजित पासिंग आउट परेड में उनके कंधे पर सितारे सजाये गए......पढ़िए आगे

Bihar News : भारतीय सेना को मिले 281 जाबांज अधिकारी, ओटीए गय
सेना में शामिल हुए अधिकारी - फोटो : SOCIAL MEDIA

GAYAJI : अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए), गयाजी में शनिवार को आयोजित 28वीं पासिंग आउट परेड के ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर पर 281 पुरुष एवं महिला अधिकारी कैडेटों को भारतीय सेना में कमीशन प्रदान किया गया। यह परेड कठोर सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण की सफल परिणति का प्रतीक बनी, जिसने अकादमी के आदर्श वाक्य “शौर्य, ज्ञान, संकल्प” की भावना को साकार किया। परेड की समीक्षा लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, PVSM, UYSM, AVSM, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान ने की। उन्होंने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले अधिकारी कैडेटों को बधाई देते हुए कहा कि बदलते युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार रखना, नवाचार को अपनाना और निरंतर ज्ञान अर्जित करना आज के सैन्य नेतृत्व की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने युवा अधिकारियों से भारतीय सेना की मूल परंपराओं और मूल्यों को सदैव बनाए रखने का आह्वान किया।

कंधे पर सजाये गए सितारे

इस पासिंग आउट परेड में कुल 281 अधिकारी कैडेटों को कमीशन प्रदान किया गया, जिनमें शॉर्ट सर्विस कमीशन तकनीकी प्रवेश (पुरुष) के 64वें पाठ्यक्रम के 253 तथा शॉर्ट सर्विस कमीशन तकनीकी प्रवेश (महिला) के 35वें पाठ्यक्रम की 28 अधिकारी कैडेट शामिल थीं। इन युवा अधिकारियों का भारतीय सेना में कमीशन होना ओटीए गया की गौरवशाली परंपरा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। परेड का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब पारंपरिक “अंतिम पग” के साथ नव-नियुक्त अधिकारियों ने सेना की सेवा में अपना पहला कदम आगे बढ़ाया। इसके बाद आयोजित पिपिंग समारोह में उनके कंधों पर सितारे सजाए गए और राष्ट्र के प्रति निष्ठा की पवित्र शपथ दिलाई गई। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में गर्वित माता-पिता, परिवारजन, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी तथा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

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प्रेरणादायी संबोधन

समीक्षा अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी और सम्मान की स्थायी प्रतिज्ञा है। उन्होंने युवा अधिकारियों से आग्रह किया कि वे वर्दी को विनम्रता और गर्व के साथ पहनें, अपने निर्णयों में ईमानदारी को मार्गदर्शक बनाएं और अपने नेतृत्व में करुणा को स्थान दें। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र, व्यक्तिगत उदाहरण और निःस्वार्थ सेवा की भावना से अर्जित होता है। ये युवा अधिकारी सम्मान और बलिदान की पीढ़ियों से निर्मित भारतीय सेना की गौरवशाली विरासत के उत्तराधिकारी हैं। ऐसे में उन्हें बदलती चुनौतियों के प्रति अनुकूल, कठिन परिस्थितियों में दृढ़ और कर्तव्य के प्रति सदैव अडिग रहना होगा।

उत्कृष्ट कैडेटों को मिले पुरस्कार

परेड के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित भी किया गया। जिसमें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर – अकेडमी अंडर ऑफिसर कुलदीप (सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर), स्वर्ण पदक – बटालियन अंडर ऑफिसर अस्विन किरुपाई (मेरिट में प्रथम स्थान), रजत पदक – अकेडमी अंडर ऑफिसर कुलदीप (मेरिट में द्वितीय स्थान), कांस्य पदक – बटालियन कैडेट एडजुटेंट चरण जी. वी. (मेरिट में तृतीय स्थान) और सेना प्रमुख बैनर – समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए गुरेज़ कंपनी को दिया गया।

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पीओपी के दौरान जोशीली कमेंट्री ने बांधा समां

पूरे समारोह का संचालन और कमेंट्री कर्नल पंकज जैन द्वारा की गई, जिसकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उनकी ओजपूर्ण पंक्तियां माहौल को और अधिक प्रेरणादायी बना गईं—“न हार में, न जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं,कर्तव्य पथ पर जो भी मिले यह भी सही, वह भी सही…मत इधर आएं डरें भयभीत हैं जो,मुश्किलों से भरा ये लंबा सफ़र है,मौत से होती यहां पर आशिकी,पुण्य पथ है ये शहीदों की डगर है। समारोह के अंत में समीक्षा अधिकारी ने नए कमीशन्ड अधिकारियों और उनके गर्वित परिवारों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा अधिकारी साहस, ईमानदारी और समर्पण के साथ राष्ट्र सेवा के अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए भारतीय सेना की सर्वोत्तम परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे।