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SONEPUR MELA: सोनपुर मेला में थियेटर इस दिन होगा शुरू,देर का कारण आया सामने,भारी संख्या में बार बालाएं पहुंची..कुछ पहले से है फेमस ...

विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला में थियेटरों को लेकर नौकटंकी जारी है। मेले के उद्घाटन के पांच दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक अड़चनों के कारण थियेटरों का संचालन नहीं शुरू होने से करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, वहीं मेले की रौनक भी फीकी पड़ गई है।

Theater will start in Sonpur Fair
सोनपुर मेला में थियेटर होगा शुरू- फोटो : Hiresh Kumar

SONEPUR MELA: विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले का आगाज हुए पांच दिन बीतने के बाद भी यहां का प्रसिद्ध थिएटरों का उद्घाटन न होने से हजारों कलाकारों और व्यापारियों का रोजगार संकट में पड़ गया है। थिएटरों को लाइसेंस न मिलने से मेले की रौनक फीकी पड़ गई है और हजारों लोगों का रोजगार दांव पर लग गया है। करोड़ों रुपये निवेश कर थिएटर बनाने वाले संचालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारत के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 1000 कलाकारों का रोजगार छिनने का खतरा मंडरा रहा है। दर्शकों की निराशा का असर मेले में आए अन्य व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। प्रशासनिक देरी और समन्वय की कमी के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। वही सारण डीएम के सक्रिय होने के बावजूद प्रशासनिक अड़चनों के कारण थिएटर संचालन में देरी हो रही है। सोनपुर एसडीओ आशीष कुमार ने आश्वासन दिया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक-दो दिन में लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे।

सोनपुर मेले में थिएटरों का बंद होना न सिर्फ कलाकारों और दुकानदारों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक आर्थिक संकट है। यह एक प्रश्न खड़ा करता है कि क्या हमारी सरकारें वास्तव में लोक कलाओं और संस्कृति को बढ़ावा देना चाहती हैं? हमें सभी को मिलकर इस मुद्दे को उठाना होगा और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना होगा।

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देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों कलाकारों का करियर दांव पर लगा है। कई कलाकारों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा थिएटर को समर्पित कर दिया है। वे महीनों से इस मेले की तैयारी में जुटे हुए थे। लाइसेंस में देरी के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। एक कलाकार ने बताया, "हमने अपनी पूरी जिंदगी इसी में लगा दी है। अब कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा। प्रशासनिक अनुमति में देरी के कारण करोड़ों रुपये का निवेश फंसा हुआ है और प्रतिदिन लाखों का नुकसान हो रहा है।वहीं मेले में आए दर्शक भी मनोरंजन से वंचित रह रहे हैं। 


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गाय बाजार, नखास क्षेत्र, हाथी बाजार और बच्चा बाबू के हाता में स्थापित थिएटर मौन साधे हुए हैं। थिएटर संचालकों ने प्रत्येक थिएटर पर 25 से 35 लाख रुपये खर्च किए हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 1000 कलाकारों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

थिएटरों के बंद रहने का असर मेले की रौनक पर भी पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि रात के समय मेले में सन्नाटा छा जाता है, जिससे उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण मेले की छवि धूमिल हो रही है।