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Bihar Politics : सियासी रिश्तों की मिसाल ! राजा साहब की दोस्ती ने रामसुंदर दास को बनाया बिहार का मुख्यमंत्री, जानिए कैसे सत्ता की केंद्र में आया सोनपुर

Bihar Politics : सियासी रिश्तों की मिसाल ! राजा साहब की दोस्

CHAPRA : बिहार की राजनीति में कुछ रिश्ते केवल सत्ता के समीकरणों पर आधारित नहीं होते, बल्कि वे इतिहास और पीढ़ियों तक चलने वाली विरासत बन जाते हैं। ऐसा ही एक अटूट संबंध बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय रामसुंदर दास और सोनपुर के 'राजा साहब' के नाम से प्रसिद्ध स्वर्गीय लगन देव सिंह के बीच रहा। यह मित्रता उस दौर की याद दिलाती है जब राजनीति में भरोसे और व्यक्तिगत संबंधों का कद पद से बड़ा होता था।

मित्रता की नींव और सोनपुर का सियासी इतिहास

बहुत कम लोगों को इस तथ्य की जानकारी है कि रामसुंदर दास का सोनपुर से चुनाव लड़ना कोई आकस्मिक फैसला नहीं था। इसके पीछे लगन देव सिंह (लगन बाबू) का गहरा आग्रह और अटूट भरोसा था। उनके ही भरोसे पर रामसुंदर दास ने सोनपुर की धरती से चुनावी रण में कदम रखा। उनकी जीत ने न केवल उन्हें विधानसभा पहुँचाया, बल्कि अंततः उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री के पद तक भी सुशोभित किया। सोनपुर की यह सीट इस तरह बिहार के सत्ता संघर्ष के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।

सत्ता से ऊपर रहा पारिवारिक जुड़ाव

मुख्यमंत्री बनने के बाद भी रामसुंदर दास और लगन देव सिंह के बीच की आत्मीयता में कभी कमी नहीं आई। उनका रिश्ता केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह दो परिवारों का साझा भावनात्मक जुड़ाव था। यह मित्रता की गहराई ही थी कि दोनों परिवारों के बीच आज भी वही आत्मीयता और सम्मान कायम है, जो दशकों पहले हुआ करता था।

प्रशासनिक और राजनीतिक धाराओं का संगम

समय के साथ दोनों परिवारों ने समाज सेवा के अलग-अलग रास्ते चुने। रामसुंदर दास की विरासत प्रशासनिक सेवा के रूप में आगे बढ़ी, जहाँ उनके पुत्रों ने आईएएस (IAS) अधिकारी बनकर देश और सुशासन की सेवा की। दूसरी ओर, राजा साहब लगन देव सिंह का परिवार राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहा। उनकी पौत्री सपना सिंह का विवाह बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुमित कुमार सिंह से हुआ, जिससे यह परिवार आज भी प्रदेश की मुख्यधारा की राजनीति का हिस्सा है।

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सक्रिय विरासत: ओम कुमार सिंह और कुँवर दीप कुमार सिंह

लगन बाबू के परिवार की अगली पीढ़ी भी अपनी विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। ओम कुमार सिंह क्षेत्रीय राजनीति में एक सक्रिय और जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं, जबकि राजा साहब के दूसरे पुत्र कुँवर दीप कुमार सिंह ने समाज सेवा के माध्यम से अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाई है। यह इस बात का प्रमाण है कि सेवा की भावना दोनों परिवारों में आज भी जीवित है।

आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायी अध्याय

रामसुंदर दास और लगन देव सिंह की यह कहानी महज एक स्मृति नहीं, बल्कि एक सबक है। यह उस दौर का आईना है जब राजनीति में वादे निभाए जाते थे और मित्रता सत्ता की सीढ़ी बनती थी। सोनपुर की मिट्टी में दर्ज यह अध्याय आज की पीढ़ी को सिखाता है कि पद और शक्ति तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन भरोसे और मूल्यों पर टिके रिश्ते पीढ़ियों तक राज्य और समाज की दिशा तय करते हैं।