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बिहार HPV वैक्सिनेशन न्यूज़:अफवाहों को मात देकर रचा इतिहास,गुजरात-एमपी से दोगुनी आबादी को किया सुरक्षित

बिहार में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चल रहा HPV टीकाकरण अभियान भ्रांतियों को पीछे छोड़ जन आंदोलन बन चुका है। 86% लक्ष्य हासिल कर बिहार देश में चौथे स्थान पर है, अभियान अब 3 महीने और बढ़ाया गया।

Cervical Cancer Vaccine
जन आंदोलन बना सर्वाइकल कैंसर का HPV टीका- फोटो : Reporter

बिहार में महिलाओं को सर्वाइकल (बच्चेदानी के मुंह का) कैंसर से बचाने के लिए चलाया जा रहा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण अभियान तमाम भ्रांतियों और अफवाहों को पीछे छोड़ते हुए अब एक बड़ा जन आंदोलन बन चुका है। आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के कड़े परिश्रम और घर-घर संवाद की बदौलत बिहार ने इतिहास रच दिया है। राज्य ने लगभग 13 लाख 62 हजार किशोरियों के कुल लक्ष्य में से रिकॉर्ड 86 प्रतिशत (11,50,701 किशोरियां) का टीकाकरण कर पूरे देश में चौथा स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि बिहार में टीकाकृत किशोरियों की यह संख्या, शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने वाले गुजरात और मध्य प्रदेश की कुल लक्षित आबादी से भी दोगुनी है।


महिलाओं के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा है सर्वाइकल कैंसर, एम्स विशेषज्ञ ने दी सलाह

बिहार में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से यह अभियान बेहद जरूरी है, क्योंकि यहाँ महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इसकी संक्रमण दर 14.1 प्रति लाख और मृत्यु दर 7.1 प्रति लाख है। पटना एम्स की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. इंदिरा प्रसाद के अनुसार, इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए टीकाकरण और समय पर स्क्रीनिंग ही सबसे प्रभावी रणनीति है। पटना के एक क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल में हुए 96 नमूनों की जांच में यह चिंताजनक बात सामने आई थी कि 77% मामलों में एचपीवी-16 और 17% मामलों में एचपीवी-18 वेरिएंट पाए गए थे, जो इस कैंसर के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।


शुरुआती दौर में अफवाहें बनी थीं चुनौती, रिसर्च में सामने आई थी जागरूकता की कमी

इस महा-अभियान की शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ थीं। समाज में प्रजनन क्षमता प्रभावित होने और टीके के दुष्प्रभावों से जुड़ी कई तरह की अफवाहें और भ्रम फैले हुए थे। जनवरी 2025 में 'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' द्वारा पटना के 801 छात्रों पर किए गए एक शोध से यह साफ हुआ था कि चिकित्सा पृष्ठभूमि के 84% छात्रों के मुकाबले गैर-चिकित्सा क्षेत्र के केवल 16% छात्रों को ही एचपीवी वैक्सीन के बारे में बुनियादी जानकारी थी। इस जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक को दूर करना अभियान की सफलता के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ था।


विशेषज्ञों के संदेश और जिलाधिकारियों की मेहनत से दूर हुआ सामाजिक भ्रम

इस भ्रम और डर को दूर करने के लिए बिहार सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक के कुशल मार्गदर्शन और अनुश्रवण की अहम भूमिका रही। इसके साथ ही सारण, गोपालगंज, कटिहार, औरंगाबाद, अरवल और वैशाली के जिलाधिकारियों (DM) की जमीनी मेहनत ने इस अभियान को कामयाबी के शिखर पर पहुंचाया। लोगों को जागरूक करने के लिए पंपलेट, पोस्टर्स, कूड़ा संग्रहण गाड़ियों (लाउडस्पीकर) और बिहार की जानी-मानी महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शांति राय एवं डॉ. मंजू गीता मिश्रा जैसी विशेषज्ञों के वीडियो संदेशों के माध्यम से जनता की शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया।


दो चरणों की सटीक माइक्रो-प्लानिंग रही सफल, अब तीन महीने और बढ़ाया गया समय

स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार की गई दो चरणों की विस्तृत और सटीक माइक्रो-प्लानिंग के कारण ही यह अभियान इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सका है। पुनपुन प्रखंड की मधु देवी जैसी हजारों समर्पित आशा कार्यकर्ताओं ने सीधे परिवारों से संवाद कर टीके के प्रति विश्वास जगाया। इस बेहतरीन शुरुआत के बाद अब सरकार का पूरा ध्यान शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर है। इसी को मद्देनजर रखते हुए इस विशेष टीकाकरण अभियान की अवधि को तीन महीने के लिए और आगे बढ़ा दिया गया है, ताकि राज्य की एक भी किशोरी इस सुरक्षा चक्र से वंचित न रह सके।

रिपोर्ट: धर्मेंद्र रस्तोगी