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Vikramshila Setu collapse: विक्रमशिला सेतु हादसा, आखिर क्यों ढही बिहार की लाइफलाइन? कौन है गुनहगार? हादसे के पीछे दबे हुए फाइलों के राज

Vikramshila Setu: कुछ वर्षों से विक्रमशिला पुल लगातार तकनीकी खामियों और जर्जर हालत को लेकर चर्चा में था। विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च 2026 में ही इसके कुछ पिलरों के पास सुरक्षा दीवारें ढह चुकी थीं, जिससे नींव सीधे गंगा के कटाव के संपर्क में आ गई थी।

Vikramshila bridge collapse Bihar lifeline under probe
आखिर क्यों ढही बिहार की लाइफलाइन?- फोटो : reporter

Vikramshila Setu collapse: उत्तर बिहार को सीमांचल से जोड़ने वाला ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु एक बार फिर गंभीर संकट और विवादों के केंद्र में आ गया है। रविवार देर रात (4 मई 2026) करीब 1:10 बजे पुल के पिलर नंबर 133 के पास का एक बड़ा स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में समा गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

गनीमत रही कि समय रहते पुलिस और प्रशासन की सतर्कता से पुल पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी, जिससे एक बड़ा जन-हादसा टल गया। वरना मुजफ्फरपुर और अररिया की ओर जाने वाली बसें और अन्य वाहन गंभीर दुर्घटना का शिकार हो सकते थे। हादसे के बाद फिलहाल पुल पर पूरी तरह से ट्रैफिक बंद कर दिया गया है और वाहनों को मुंगेर तथा सुल्तानगंज की ओर डायवर्ट किया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक, घटना से कुछ घंटे पहले यानी रात करीब 11:33 बजे पुल के पिलर नंबर 133 के पास जमीन धंसने और दरारें फैलने के संकेत मिले थे। पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद एहतियातन पुल को खाली कराया गया। इसके करीब डेढ़ घंटे बाद 25 मीटर लंबा स्लैब सीधे गंगा की तेज धाराओं में समा गया।

विक्रमशिला सेतु का निर्माण 1990 के दशक में शुरू हुआ था और जुलाई 2001 में इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में हुआ था। लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल को उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने बनाया था और उस समय इसकी लागत करीब 838 करोड़ रुपये बताई गई थी।

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लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह पुल लगातार तकनीकी खामियों और जर्जर हालत को लेकर चर्चा में था। विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च 2026 में ही इसके कुछ पिलरों के पास सुरक्षा दीवारें ढह चुकी थीं, जिससे नींव सीधे गंगा के कटाव के संपर्क में आ गई थी। इसके अलावा, एक्सपेंशन जॉइंट्स में बढ़ता गैप और भारी वाहनों के दबाव से पुल में लगातार कंपन महसूस किया जा रहा था।

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक तकनीकी हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और निगरानी में चूक का गंभीर उदाहरण है। फिलहाल पूरे इलाके में यातायात अस्त-व्यस्त है और लोग वैकल्पिक मार्गों पर भारी जाम और परेशानियों का सामना कर रहे हैं।