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सुप्रीम कोर्ट के 'स्टे' को TMBU की चुनौती! रोक के बावजूद विवि ने थोपा नया कानून, , कॉलेजों को अल्टीमेटम, 3 दिन में कमेटी नहीं बनी तो नपेंगे प्रिंसिपल

यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कथित तौर पर रोक (Stay) लगाए जाने के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने तानाशाही रुख अपनाते हुए सभी कॉलेजों में 'छात्र शिकायत निवारण समिति' के पुनर्गठन का फरमान जारी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के 'स्टे' को TMBU की चुनौती! रोक के बावजूद विव

Bhagalpur - तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद कदम उठाते हुए अपने सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों में 'छात्र शिकायत निवारण समिति' (Students Grievance Redressal Committee) के पुनर्गठन का निर्देश जारी किया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी पत्र संख्या DSW/23/26 के माध्यम से सभी प्रिंसिपलों को अविलंब इस समिति को धरातल पर उतारने को कहा गया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कथित तौर पर रोक (Stay) लगाए जाने की चर्चाएं गर्म हैं, जिससे विश्वविद्यालय और न्यायिक आदेशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। 

समिति का स्वरूप: प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर

विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, इस नई समिति का ढांचा काफी विस्तृत रखा गया है। समिति की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य या वरिष्ठतम शिक्षक करेंगे। इसके अलावा, इसमें चार अन्य सदस्यों को शामिल किया जाना अनिवार्य है, जिनमें सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए एक महिला सदस्य और एक सदस्य OBC/SC/ST समुदाय से होना आवश्यक है। साथ ही, छात्रों की समस्याओं को सीधे तौर पर सुनने के लिए एक 'छात्र प्रतिनिधि' को भी इस समिति का हिस्सा बनाया गया है। 

तीन दिनों की कड़ी समय सीमा और जवाबदेही

TMBU प्रशासन ने इस कार्य को 'अति आवश्यक' की श्रेणी में रखा है और सभी कॉलेजों को विवरण साझा करने के लिए मात्र तीन दिनों का समय दिया है। कॉलेजों को समिति के गठन के साथ-साथ अध्यक्ष और सदस्यों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और कॉलेज की वेबसाइट का विवरण विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराना होगा। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय के भीतर समिति का गठन नहीं किया जाता है, तो इसके लिए होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या जिम्मेदारी के लिए संबंधित कॉलेज के प्राचार्य स्वयं जवाबदेह होंगे। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और विश्वविद्यालय की जल्दबाजी

विश्वविद्यालय के इस कदम ने एक नई कानूनी बहस को जन्म दे दिया है। चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए कानूनों के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा रखी है, बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नई कमेटी बनाने का आदेश जारी करना कानूनी पेचीदगियां पैदा कर सकता है। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यदि यह आदेश यूजीसी के उन नियमों के तहत है जिन पर न्यायिक रोक है, तो विश्वविद्यालय को आने वाले दिनों में स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है। फिलहाल, रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर से जारी यह आदेश कॉलेजों में चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

रिपोर्ट - अंजनी कुमार कश्यप

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