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कटिहार में 'पिंक मशरूम' की धूम: प्रीति दीदी ने शुरू की पहली बार खेती, आयरन और कैल्शियम से भरपूर है यह सुपरफूड

कटिहार के गौशाला क्षेत्र में पहली बार 'पिंक मशरूम' की खेती कर कुमारी प्रीति ने महिला उद्यमिता की नई मिसाल पेश की है। उनके इस नवाचार ने न केवल स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक किया है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं।

कटिहार में 'पिंक मशरूम' की धूम: प्रीति दीदी ने शुरू की पहली

Katihar -: अब तक आपने केवल सफेद मशरूम के बारे में सुना और चखा होगा, लेकिन बिहार के कटिहार जिले में पहली बार 'पिंक मशरूम' की खेती कर कुमारी प्रीति चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। गौशाला की रहने वाली प्रीति दीदी ने अपने ही घर में बड़े पैमाने पर इस रंगीन और औषधीय गुणों से भरपूर मशरूम की फसल उगाई है, जिसे देखने और सीखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं। 

सफेद मशरूम से बेहतर और गुणकारी

कुमारी प्रीति के अनुसार, वे पहले सफेद मशरूम की खेती करती थीं, लेकिन पिंक मशरूम की खेती उससे कहीं अधिक फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि पिंक मशरूम आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सफेद मशरूम की तुलना में कम मेहनत लगती है और लागत भी कम आती है। प्रीति दीदी ने इसका बीज सबौर (भागलपुर) से प्राप्त किया था। 

महिलाओं के लिए बना प्रेरणा का स्रोत

प्रीति दीदी की इस पहल ने उन महिलाओं की सोच बदल दी है जो कभी उनकी इस खेती पर सवाल उठाती थीं। आज वही महिलाएं प्रीति दीदी के साथ जुड़कर पिंक मशरूम उगाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। स्थानीय निवासी गुंजा देवी ने बताया कि वे भी अब इस काम को सीखना चाहती हैं। वे वर्तमान में प्रीति दीदी के साथ हेल्पर के रूप में काम कर रही हैं और जल्द ही स्वतंत्र रूप से इसकी खेती शुरू करने की योजना बना रही हैं। 

कम लागत और बेहतर स्वाद

पिंक मशरूम न केवल देखने में खूबसूरत है, बल्कि खाने में भी इसका स्वाद सफेद मशरूम से थोड़ा बेहतर माना जाता है। बाजार में इसकी कीमत भी लगभग सफेद मशरूम के बराबर ही है, लेकिन इसके औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रीति ने बताया कि यह मशरूम जैसे-जैसे बड़ा होता है, इसका गुलाबी रंग और भी गहरा और आकर्षक हो जाता है। 

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स्वरोजगार की नई राह

कटिहार में पिंक मशरूम की यह पहली सफल कोशिश मानी जा रही है। प्रीति दीदी की सफलता यह दर्शाती है कि कम जगह और सीमित संसाधनों में भी अगर सही तकनीक अपनाई जाए, तो कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। इस नवाचार से न केवल प्रीति की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं में भी आत्मनिर्भर बनने का नया उत्साह जगा है।

Report -  shayam