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भागलपुर को कचरा मुक्त बनाने की जिद: 21 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता आलोक यादव

भागलपुर शहर को साफ-सुथरा बनाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता आलोक यादव भूख हड़ताल पर बैठे। उनके अनशन के 21 दिन बीत चुके है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत बिगड़ रही है, बावजूद इसके वे अपनी मांग पर अड़े हुए है....

भागलपुर को कचरा मुक्त बनाने की जिद: 21 दिनों की भूख हड़ताल प
शहर को कचरा मुक्त बनाने के लिए अनशन पर आलोक यादव- फोटो : बाल मुकुंद कुमार

Bhagalpur : रेशम नगरी भागलपुर में गंदगी और कचरे के अंबारों के खिलाफ एक युवा ने गांधीवादी तरीके से आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता आलोक यादव शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था और नगर निगम की सुस्ती के खिलाफ 21 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। उनका यह अनशन अब धीरे-धीरे जन-आंदोलन का रूप लेने लगा है, जिसने नगर निगम प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक की चिंता बढ़ा दी है। धरने पर बैठे आलोक का संकल्प है कि जब तक शहर को कचरे से स्थायी मुक्ति नहीं मिलती, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।


आलोक यादव का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था केवल कागजों, टेंडरों और बड़े बजटों तक ही सिमट कर रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। शहर के मोहल्लों में कूड़े का ढेर लगा है और लोग बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि डंपिंग यार्ड का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए और प्रत्येक वार्ड में कचरा प्रबंधन की ठोस एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।

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जैसे-जैसे अनशन के दिन बीत रहे हैं, आलोक की शारीरिक स्थिति तो कमजोर पड़ रही है, लेकिन उनका मनोबल और भी मजबूत होता दिख रहा है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और उन्हें अनशन तोड़ने की सलाह दे रही है, पर आलोक अपनी जिद पर अडिग हैं। उनकी इस 'तपस्या' ने सोए हुए सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। शहरवासी अब इसे केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि पूरे भागलपुर के स्वाभिमान और स्वास्थ्य की लड़ाई मान रहे हैं।


इस आंदोलन की गूंज अब शहर की गलियों से निकलकर प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच चुकी है। भारी संख्या में छात्र, व्यवसायी और आम नागरिक धरना स्थल पर पहुंचकर आलोक यादव को अपना समर्थन दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि करोड़ों के बजट खर्च करने के बाद जो सुधार नगर निगम नहीं ला सका, उसे इस युवा के संघर्ष ने जन-चर्चा का मुख्य विषय बना दिया है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि प्रशासन अब तक किसी ठोस समाधान के साथ सामने नहीं आया है।

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अब भागलपुर की जनता की निगाहें पूरी तरह से जिला प्रशासन और सरकार के रुख पर टिकी हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सत्ता के शिखर पर बैठे अधिकारी इस सत्याग्रही की आवाज सुनकर शहर की सूरत बदलने के लिए गंभीर कदम उठाएंगे या फिर शहर को दोबारा उसी गंदगी के साये में छोड़ दिया जाएगा। फिलहाल, आलोक यादव का यह संघर्ष भागलपुर के इतिहास में स्वच्छता के प्रति एक बड़ी क्रांति के रूप में दर्ज होता दिख रहा है।


बालमुकुंद की रिपोर्ट