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आचार संहिता उल्लंघन मामले में पूर्व भाजपा विधायक और जदयू नेता को जेल, 16 साल पुराने केस में कोर्ट की सख्ती

एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने मंगलवार को दोनों नेताओं की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। यह मामला साल 2010 में चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी संपत्तियों पर अवैध रूप से पोस्टर-बैनर लगा

आचार संहिता उल्लंघन मामले में पूर्व भाजपा विधायक और जदयू नेत

Bhagalpur -: आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े 16 साल पुराने एक मामले में मंगलवार को बड़ी कार्रवाई हुई है। पीरपैंती के पूर्व भाजपा विधायक एवं तत्कालीन जिला पार्षद अमन पासवान और जदयू नेता हीरालाल पासवान को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने न्यायिक हिरासत में ले लिया है। अदालत के इस आदेश के बाद दोनों नेताओं को जेल भेजने की दस्तावेजी प्रक्रिया और कानूनी कवायद तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई।

अदालत में मंगलवार को प्रथम पाली की सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं ने सरेंडर करते हुए जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, विशेष न्यायाधीश ने उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। दरअसल, पिछली कई सुनवाइयों के दौरान अदालत में उपस्थित न होने के कारण न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए उनका बेल बॉन्ड (बंध पत्र) पहले ही रद्द कर दिया था और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया हुआ था।

यह कानूनी कार्रवाई 24 दिसंबर 2025 को अदालत द्वारा लिए गए एक कड़े फैसले का परिणाम है। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केस रिकॉर्ड पर बयान और साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद दोनों आरोपी नेता न्यायालय में हाजिर नहीं हो रहे थे। इसी कारण उनके विरुद्ध एनबीडब्ल्यू (गैर-जमानती वारंट) जारी किया गया था। मंगलवार को जब दोनों ने वारंट के दबाव में आत्मसमर्पण किया, तो कोर्ट ने उन्हें राहत देने के बजाय हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया।

मामले की जड़ें साल 2010 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी हैं। 9 सितंबर 2010 को कहलगांव के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने अंतिचक थाने में इन दोनों नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अमन पासवान और हीरालाल पासवान ने चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी नियमों को ताक पर रखकर बिजली के खंभों और अन्य सरकारी संपत्तियों पर अपने पोस्टर और बैनर लगाए थे, जो आदर्श चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन था।

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पिछले 16 वर्षों से यह मामला अंतिचक थाने में लंबित चला आ रहा था और कोर्ट में इसकी सुनवाई जारी थी। लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया से बचते रहने के बाद अब दोनों नेताओं पर कानून का शिकंजा कस गया है। भागलपुर के राजनीतिक गलियारों में इस घटना के बाद हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह मामला न केवल पुराना है बल्कि इसमें सत्ताधारी दलों से जुड़े प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं।