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खाली होगी बेतिया राज की जमीन, 125 सालों से बसे 350 से ज्यादा परिवारों पर मंडराया बेघर होने का खतरा, प्रशासन का अल्टीमेटम के बाद ठंडे पड़े चूल्हे

Bettiah Raj Land Dispute - बेतिया राज की जमीन पर बसे 355 परिवारों को बेदखली का नोटिस मिला है। 125 साल से रह रहे इन लोगों के पास बाढ़ और आगलगी के कारण पुराने कागजात नहीं बचे हैं, जिससे अब उनके सिर से छत छिनने का खतरा पैदा हो गया है।

खाली होगी बेतिया राज की जमीन, 125 सालों से बसे 350 से ज्यादा

Bettiah - बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। भितहा प्रखंड में 'बेतिया राज' की जमीन पर पीढ़ियों से बसे करीब 355 परिवारों को घर खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। अंचल प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से सैकड़ों गरीबों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है।

125 साल का आशियाना, अब उजड़ने की कगार पर

प्रभावित ग्रामीणों—रामप्रताप बैठा, गौरीशंकर गुप्ता और नथुनी राम समेत अन्य—का कहना है कि वे यहाँ 125 वर्षों से भी अधिक समय से रह रहे हैं। उनके पूर्वजों को यह जमीन बेतिया राज की ओर से दी गई थी। आज चौथी-पांचवीं पीढ़ी यहाँ रह रही है, लेकिन अब अचानक उन्हें 'अतिक्रमणकारी' बताकर हटाने की तैयारी की जा रही है।

बाढ़ और आगलगी ने छीने कागजात, प्रशासन मांग रहा सबूत

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या कागजी सबूतों की है। पीड़ितों का कहना है कि दशकों के दौरान इलाके में आई भीषण बाढ़ और कई बार हुई आगलगी की घटनाओं में उनके पुराने कागजात नष्ट हो गए हैं। अब अंचल प्रशासन उनसे सवा सौ साल पुराने दस्तावेज मांग रहा है, जो उपलब्ध करा पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है।

"सड़क पर आ जाएंगे हम": ग्रामीणों की गुहार

अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर घर बनाने वाले इन मजदूरों और गरीबों का कहना है कि अगर उनके घर तोड़े गए, तो वे सीधे सड़क पर आ जाएंगे। उनके पास रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। ग्रामीणों ने सरकार और बेतिया राज प्रबंधक से सहानुभूति बरतने की अपील की है। लोग मांग कर रहे हैं कि या तो उन्हें यह जमीन लीज पर दे दी जाए या नए सिरे से इसकी नीलामी कर उन्हें बसने का हक दिया जाए।

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प्रशासन का पक्ष: "मैनेजर के हाथ में है चाबी"

भितहा के अंचल अधिकारी (CO) मनोरंजन शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई बेतिया राज प्रबंधक के निर्देश पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों पर सहानुभूति बरतनी है या बेदखली की कार्रवाई करनी है, इसका पूरा फैसला बेतिया राज प्रबंधक पर ही निर्भर है। अंचल प्रशासन सिर्फ उनके आदेशों का पालन कर रहा है।