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Bihar News : मातृभूमि की 30 वर्षों तक सेवा कर लौटे सूबेदार मेजर हीरा कुमार यादव का भव्य स्वागत, देशभक्ति के नारों से गूंजा इलाका

Bihar News : मातृभूमि की 30 वर्षों तक सेवा कर लौटे सूबेदार म

Bettiah : देश की सीमाओं की रक्षा और भारत माता की सेवा में अपने जीवन के तीन दशक समर्पित करने के बाद, सूबेदार मेजर हीरा कुमार यादव आज अपने पैतृक गांव वापस लौटे। जम्मू के डोडा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में तैनात रहे हीरा कुमार ने 30 वर्ष, 04 महीने और 26 दिनों तक पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद घर वापसी पर जिला वासियों और ग्रामीणों ने पलकें बिछा दीं और एक वीर योद्धा की तरह उनका जोरदार अभिनंदन किया।

गांव की सीमा पर पहुंचते ही युवाओं और बुजुर्गों ने पुष्प वर्षा और देशभक्ति के नारों के साथ उनका स्वागत किया। गाजे-बाजे के साथ निकले जुलूस में हर तरफ तिरंगा लहरा रहा था और 'भारत माता की जय' के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। जिला वासियों के लिए यह केवल एक सैनिक की वापसी नहीं, बल्कि एक ऐसे नायक का सम्मान था जिसने अपने जीवन का स्वर्णिम समय देशहित को सर्वोपरि मानकर दुर्गम पहाड़ियों और कठिन परिस्थितियों में बिताया।

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इस भावुक अवसर पर सूबेदार मेजर हीरा कुमार यादव ने अपने संघर्षपूर्ण और गौरवशाली सफर को याद किया। उन्होंने कहा, "मैंने भारत के हर उस दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में ड्यूटी की, जहां मुझे सेवा का अवसर प्रदान किया गया। एक सिपाही के रूप में फौज में भर्ती होकर अंतिम रैंक सूबेदार मेजर तक का सफर तय करना मेरे लिए अत्यंत गौरवपूर्ण रहा है।" उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद और जनता के प्यार को दिया, जिससे उन्हें हर मोर्चे पर डटे रहने की शक्ति मिली।

सैनिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया और कहा कि अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही एक सैनिक की असली पहचान है। डोडा जैसे इलाकों में तैनाती के दौरान मिली चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय सेना का मनोबल हमेशा ऊंचा रहता है और देश की अखंडता की रक्षा के लिए वे सदैव तत्पर रहे। उनकी आंखों में अपनी वर्दी के प्रति सम्मान और अपनी मिट्टी के प्रति प्रेम साफ झलक रहा था।

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कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने उन्हें सम्मानित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने कहा कि हीरा कुमार यादव जैसे वीर सपूत पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके भीतर का सैनिक जज्बा बरकरार है, जो अब समाज निर्माण और युवाओं को सेना में जाने के लिए मार्गदर्शन देने में सहायक सिद्ध होगा। पूरा गांव आज गौरवान्वित था कि उनके बीच एक ऐसा योद्धा लौटा है जिसने तिरंगे की शान को कभी झुकने नहीं दिया। 

आशीष की रिपोर्ट