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Bihar Land: जमीन कागज में फंसी, घर में बेटी बैठी, पश्चिम चंपारण में 500 एकड़ की गड़बड़ी पर किसानों की डीएम से फरियाद- हुजूर, जमाबंदी सुधारिए वरना कैसे होगी शादी-ब्याह?

Bihar Land: जमीन के कागजी खेल ने किसानों की जिंदगी को ऐसी उलझन में डाल दिया है कि अब वे न्याय की गुहार लेकर सीधे डीएम ऑफिस पहुंच गए।

Jamabandi complain about irregularities in 500 acres
जमाबंदी में गड़बड़ी- फोटो : reporter

Bettiah: जमीन के कागजी खेल ने किसानों की जिंदगी को ऐसी उलझन में डाल दिया है कि अब वे न्याय की गुहार लेकर सीधे जिला मुख्यालय पहुंच गए। भितहा अंचल के खाप टोला और परसौना कोइरी टोला के दर्जनों किसान सोमवार को समाहरणालय पहुंचे और जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह के सामने अपनी दर्दभरी दास्तान रखी। किसानों ने आवेदन देकर मांग की कि उनकी जमीन की गलत जमाबंदी को जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाए, क्योंकि इसी गड़बड़ी ने उनकी जिंदगी को मुश्किलों के भंवर में डाल दिया है।

किसानों का कहना है कि उनकी जमीन जिस मौजा में स्थित है, उसकी जमाबंदी गलती से दूसरे मौजा में दर्ज कर दी गई है। इस एक कागजी भूल ने ऐसा बखेड़ा खड़ा कर दिया है कि अब किसान अपनी ही जमीन का सौदा नहीं कर पा रहे। खरीद-बिक्री तो दूर, बैंक से कर्ज लेना या दूसरे जरूरी कागजी काम भी ठप पड़े हैं।

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किसानों का आरोप है कि इस मसले को लेकर वे महीनों से अंचल कार्यालय भितहा का चक्कर काट रहे हैं। 7 सितंबर 2024 को अंचलाधिकारी ने भरोसा दिया था कि 15 दिनों के भीतर जमाबंदी की गलती सुधार दी जाएगी। मगर जनाब, वक्त बीतता गया और फाइलें दफ्तरों में ही धूल फांकती रहीं।

जब अंचल कार्यालय से कोई राहत नहीं मिली तो 27 सितंबर 2024 को किसानों ने बगहा के अनुमंडल पदाधिकारी और उप समाहर्ता को भी आवेदन दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने भूमि सुधार मंत्री तक अपनी फरियाद पहुंचाई। मगर हालात जस के तस बने हुए हैं।

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किसानों का कहना है कि इस गड़बड़ी से भितहा अंचल के सैकड़ों किसानों की करीब 500 एकड़ रैयती जमीन प्रभावित है। हालात ऐसे हो गए हैं कि जरूरत के वक्त वे अपनी जमीन बेचकर भी पैसा नहीं जुटा पा रहे। कई किसानों ने दर्द भरे लहजे में कहा कि बेटी की शादी तक अटकी हुई है और घर में बीमारी होने पर इलाज के लिए भी पैसे नहीं जुट पा रहे।

अब किसानों की निगाहें जिला पदाधिकारी पर टिकी हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। फिलहाल प्रशासन ने आवेदन ले लिया है, लेकिन किसानों को इंतजार है उस फैसले का जो उनके खेत-खलिहान ही नहीं, उनके घर की खुशियां भी लौटा सके।

रिपोर्ट- आशीष कुमार