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Bihar News: नगर निगम की बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा, नगर निगम की चौखट पर आत्मदाह की कोशिश से हिला शहर

Bihar News: नगर निगम की बैठक शनिवार की रात सियासी ड्रामे और तल्ख़ टकराव का अखाड़ा बन गई।

Bihar News: नगर निगम की बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा,  नगर नि
नगर निगम की चौखट पर आत्मदाह की कोशिश से हिला शहर- फोटो : reporter

Bihar News: नगर निगम की बैठक शनिवार की रात सियासी ड्रामे और तल्ख़ टकराव का अखाड़ा बन गई। विकास की बात करने जुटे पश्चिम चंपारण के बेतिया के जनप्रतिनिधि आपस में इस कदर उलझे कि मामला योजनाओं से निकलकर सड़क और आत्मदाह की धमकी तक जा पहुंचा। देर रात तक चली बैठक में जब विकास योजनाओं पर सहमति नहीं बन सकी, तो पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा और आरोपों की बौछार महापौर गरिमा देवी सिकरिया पर होने लगी।

पार्षदों का आरोप है कि नियम के तहत बुलाई गई बैठक में कई विकास योजनाओं को पार्षदों की सहमति से पास किया गया। इन योजनाओं को लेटर पैड पर लिखकर महापौर को सौंपा गया, लेकिन महापौर ने कथित तौर पर उस कागज़ को फेंक दिया और बिना कुछ कहे बैठक से उठकर चली गईं। बस यहीं से माहौल गरमा गया। नारेबाज़ी शुरू हुई, हंगामा बढ़ा और स्थिति हाथ से निकलती चली गई।

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हंगामे की तीव्रता को देखते हुए मौके पर मौजूद सभी पदाधिकारी बैठक स्थल छोड़कर निकल गए। इसके बाद पार्षद नगर निगम के मुख्य गेट पर पहुंच गए और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया। हालात तब और गंभीर हो गए जब कुछ पार्षदों ने अपने ऊपर तेल छिड़क कर आत्महत्या करने की कोशिश की। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया और एक बड़े हादसे को टाल दिया। पुलिस ने स्थिति को काबू में लेते हुए प्रदर्शनकारी पार्षदों को हिरासत में ले लिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने बेतिया की सियासत को झकझोर कर रख दिया है। बैठक में मौजूद विधान पार्षद (एमएलसी) वीरेंद्र प्रसाद यादव और बिहार की पूर्व उपमुख्यमंत्री सह बेतिया विधायक रेणु देवी ने महापौर पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं का कहना था कि बैठक का मकसद बेतिया नगर निगम का सर्वांगीण विकास था, लेकिन महापौर का रवैया यह दर्शाता है कि वह विकास के बजाय राजनीति कर रही हैं। शहर में न नाला बन रहा है, न ड्रेनेज की व्यवस्था दुरुस्त है और न ही स्ट्रीट लाइटें लग रही हैं।

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एमएलसी वीरेंद्र प्रसाद यादव ने तो यहां तक कह दिया कि नगर निगम में “हिटलरशाही” चल रही है और महापौर को शहर के विकास की कोई फिक्र नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को सदन में उठाया जाएगा और कार्रवाई की मांग की जाएगी।

फिलहाल महापौर का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। सवाल यह है कि क्या बेतिया की सियासत विकास की पटरी पर लौटेगी या यूं ही आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की आग में झुलसती रहेगी।

रिपोर्ट- आशीष कुमार