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Bihar News : बेतिया में फाइलेरिया व कीड़े की दवा खाने से 19 बच्चे बीमार, ग्रामीणों ने आशा कार्यकर्ताओं को बनाया बंधक

Bihar News : बेतिया में फाइलेरिया व कीड़े की दवा खाने से 19 ब

BETTIAH : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के गौनाहा प्रखंड से एक विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ राजकीय प्राथमिक विद्यालय अहरार पिपरा और आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-67 में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत अल्बेंडाजोल (कीड़े की दवा) और फाइलेरिया की दवा खाने के बाद अचानक 19 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। दवा सेवन के कुछ ही देर बाद बच्चों को पेट में तेज दर्द, हाथ-पैर में जकड़न, बेचैनी और शरीर का तापमान गिरने जैसी शिकायतें होने लगीं। इस घटना से पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।

घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए मौके पर मौजूद दो आशा कार्यकर्ताओं, सरस्वती देवी और नूतन राज को स्कूल परिसर में ही करीब ढाई घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों का कहना था कि दवा खिलाते समय किसी एएनएम (ANM) की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए थी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में ही आशा कार्यकर्ताओं ने बच्चों को दवा दे दी। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पांचवीं कक्षा की छात्रा निभा कुमारी की हालत गंभीर होने लगी, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वार्ड संख्या-13 की सोनी देवी ने तुरंत गौनाहा रेफरल अस्पताल को सूचित किया। सूचना मिलते ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशि कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन एंबुलेंस गांव भेजीं। सभी बीमार बच्चों (जिसमें 15 स्कूली बच्चे और 4 आंगनबाड़ी के बच्चे शामिल हैं) को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज शुरू किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार फिलहाल बच्चों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यक उपचार दिया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद बंधक बनाई गई दोनों आशा कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त कराया। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर गौनाहा बीडीओ ऋषभदेव प्रसाद और प्रभारी बीईओ दीपक कुमार ने भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हालचाल जाना और उनके परिजनों को उचित चिकित्सा सहायता का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने घटना के कारणों की जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।

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स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह दवा वितरण फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का हिस्सा था। हालांकि, दवा खाने के बाद बच्चों के इस तरह बीमार होने से अभियान की सुरक्षा और वितरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह के अभियानों में विशेषज्ञ चिकित्सा कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो।

आशीष की रिपोर्ट