Bihar News: 10 साल बाद पकड़ा गया फरार नक्सली तारकेश्वर, पुलिस और SSB का बड़ा ऑपरेशन

Bihar News: बांका जिले में लंबे समय से फरार चल रहे नक्सली तारकेश्वर राय को पुलिस और एसएसबी की टीम ने पहाड़ बाबा मंदिर के पास गिरफ्तार किया। वह मुंगेर और बांका पुलिस का वांछित था, जिस पर कई गंभीर नक्सली मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी से पुलिस को बड़ी

Bihar News: 10 साल बाद पकड़ा गया फरार नक्सली तारकेश्वर, पुलि

बांका जिले में लंबे समय से फरार चल रहे वांछित नक्सली तारकेश्वर राय को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। सूचना मिली थी कि वह रात में किसी से मिलने पहाड़ बाबा मंदिर के पास पहुंचेगा। इस इनपुट पर एसपी मदर कुमार आनंद और 16वीं वाहिनी एसएसबी के कमांडेंट अनिल कुमार पठानिया के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। सी-समवाय प्रभारी अभिनव तोमर और चरकापत्थर थानाध्यक्ष विशाल कुमार सिंह के नेतृत्व में चलाए गए सर्च ऑपरेशन में तारकेश्वर को दबोच लिया गया।

कई जिलों में नामजदमोबाइल डिटेल से खंगाली जा रही नेटवर्किंग

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तारकेश्वर राय वर्षों से मुंगेर और बांका पुलिस का वांछित नक्सली था। उसके खिलाफ चंद्रमंडीह समेत कई थानों में गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस उसकी गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है कि क्या वह अब भी नक्सली संगठन से जुड़ा है। उसके मोबाइल से मिले डाटा की तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है।

पहले भी जा चुका है जेल, SLR के साथ हुई थी गिरफ्तारी

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करीब एक दशक पहले 2010 के आसपास तारकेश्वर नक्सली संगठन से जुड़ा था। मुंगेर पुलिस ने आठ वर्ष पूर्व उसे एक नक्सली कांड में SLR के साथ गिरफ्तार किया था। वह वर्षों तक मुंगेर जेल में बंद रहा और दो वर्ष पहले ही रिहा हुआ था। 2010 से 2015 के बीच मुंगेर, बांका, लखीसराय और भागलपुर में दर्जनभर नक्सली वारदातों में उसकी सक्रिय भूमिका रही थी।

स्थायी वारंटी और कुर्की-जप्ती का सामना कर रहा था

वर्तमान में तारकेश्वर मुंगेर थाने का स्थायी वारंटी था। बांका के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने उसके खिलाफ कुर्की-जप्ती का आदेश भी जारी किया था। चंद्रमंडीह थाना क्षेत्र में हुई एक बैंक डकैती में भी उसकी संलिप्तता की जांच चल रही है। गिरफ्तारी के बाद उसे आवश्यक औपचारिकताओं के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

जमुई नहींसीमावर्ती जिले थे इसका कार्यक्षेत्र

चिल्काखार गांव निवासी तारकेश्वर राय ने अपने गृह जिले जमुई को कभी भी अपने ऑपरेशन का केंद्र नहीं बनाया। उसका सक्रिय क्षेत्र बांका, मुंगेर, लखीसराय और भागलपुर रहा। पुलिस के अनुसार वह संगठन में ऊंचे स्तर पर था और अक्सर एसएलआर व घातक हथियारों के साथ देखा जाता था।