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Bihar News : आरा में ब्लिंकिट डिलीवरी बॉयज का हल्ला बोल, वेतन कटौती के खिलाफ किया प्रदर्शन, 10 मिनट की डेडलाइन को बताया जानलेवा

Bihar News : आरा में ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉयज ने जमकर बवाल काटा. उन्होंने वेतन में कटौती को लेकर प्रदर्शन किया. साथ ही 10 मिनट की डेडलाइन को जानलेवा बताया.....पढ़िए आगे

Bihar News : आरा में ब्लिंकिट डिलीवरी बॉयज का हल्ला बोल, वेत
ब्लिंकिट डिलीवरी बॉयज ने काटा बवाल - फोटो : ASHISH

ARA : भोजपुर जिला मुख्यालय के पकड़ी स्थित सर्किट हाउस के सामने आज 'ब्लिंकिट' (Blinkit) कंपनी के डिलीवरी वर्कर्स (गिग वर्कर्स) ने जमकर हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया। भारी संख्या में जुटे इन राइडर्स ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और कामकाज ठप कर दिया। प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का मुख्य आरोप है कि कंपनी लगातार उनके वेतन में कटौती कर रही है और कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस हड़ताल के कारण शहर के कई हिस्सों में क्विक कॉमर्स सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कंपनी ने उनके प्रति डिलीवरी भुगतान (Pay-out) में भारी गिरावट की है। पहले जहां राइडर्स को एक ऑर्डर पहुंचाने के लिए ₹32 से ₹35 मिलते थे, उसे घटाकर अब महज ₹15 से ₹22 कर दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और भीषण गर्मी के बीच 10-12 घंटे काम करने के बाद भी वे बमुश्किल ₹500–₹600 ही कमा पा रहे हैं। इस आय से घर का खर्च चलाना नामुमकिन हो गया है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

Diarch GO

विरोध का एक बड़ा कारण कंपनी की '10 मिनट डिलीवरी' पॉलिसी भी है। राइडर्स का कहना है कि महज 10 मिनट के भीतर सामान पहुंचाने का दबाव उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इस समय सीमा को पूरा करने के चक्कर में उन्हें सड़कों पर तेज गाड़ी चलानी पड़ती है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। वर्करों ने आरोप लगाया कि कंपनी केवल अपने मुनाफे के लिए उनकी जान जोखिम में डाल रही है। उन्होंने मांग की है कि डिलीवरी के लिए समय सीमा को तर्कसंगत बनाया जाए ताकि किसी की जान को खतरा न हो।

गिग वर्कर्स ने अपनी बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी उन्हें 'कर्मचारी' न मानकर 'पार्टनर' कहती है, जिसके कारण उन्हें पीएफ (PF), बीमा या पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। इतना ही नहीं, वर्करों में इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि बिना किसी स्पष्ट कारण या सुनवाई के उनकी लॉगिन आईडी ब्लॉक कर दी जाती है। इससे उनका रोजगार अचानक छिन जाता है और वे कहीं के नहीं रहते। उन्होंने इसे सीधे तौर पर मानसिक और आर्थिक शोषण करार दिया है।

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हालांकि, हालिया खबरों के अनुसार केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा को लेकर कुछ राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन आरा के इन वर्कर्स का कहना है कि जब तक उनकी स्थानीय समस्याओं और वेतन संरचना में सुधार नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे समाजसेवी और स्थानीय लोगों ने भी इन युवाओं की मांगों का समर्थन किया और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप कर कंपनी को उचित निर्देश देने की अपील की है। 

आशीष की रिपोर्ट