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Bank strike: पाँच दिवसीय बैंकिंग की माँग पर सरकारी बैंक कर्मचारियों ने किया हड़ताल, कामकाज ठप, सड़कों पर हुकूमत के ख़िलाफ़ हुंकार

Bank strike: आज सियासत और रोज़मर्रा की ज़िंदगी की रगें एक-दूसरे से टकराती नज़र आईं। पाँच दिवसीय बैंकिंग कार्यदिवस को लागू करने समेत कई मांगों को लेकर बैंक कर्मियों की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल ने शहर का मिज़ाज बदल दिया। ...

Bank Staff Strike for 5 Day Week Work Hit Protests Erupt
पाँच दिवसीय बैंकिंग की माँग पर सरकारी बैंक कर्मचारियों ने किया हड़ताल- फोटो : reporter

Bank strike: आज सियासत और रोज़मर्रा की ज़िंदगी की रगें एक-दूसरे से टकराती नज़र आईं। पाँच दिवसीय बैंकिंग कार्यदिवस को लागू करने समेत कई मांगों को लेकर बैंक कर्मियों की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल ने शहर का मिज़ाज बदल दिया। भोजपुर ज़िले के आरा शहर में स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, कतीरा के सामने बैंक कर्मियों ने ज़ोरदार प्रदर्शन कर सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की। नारों में नाराज़गी थी, और नाराज़गी में इरादा कि अब सिर्फ़ वादों से काम नहीं चलेगा।

प्रदर्शनकारी बैंक कर्मियों का कहना था कि जब मुल्क के कई सेक्टरों में पाँच दिवसीय कार्य-संस्कृति लागू है, तो फिर बैंकों के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों? उनका इल्ज़ाम साफ़ था, हुकूमत ने पहले भी पाँच दिवसीय बैंकिंग की बात कही, मगर हर बार इसे लागू करने के नाम पर कर्मचारियों को गुमराह किया गया। क़ौल और फ़ैसले में फ़ासला क्यों? यह सवाल प्रदर्शन का केंद्रीय नारा बन गया।

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बैंक कर्मचारी यूनियनों ने इत्तिहाद दिखाते हुए कहा कि यह हड़ताल चेतावनी है, आख़िरी क़दम नहीं। अगर सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से ग़ौर नहीं किया, तो आने वाले दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता भी खुला है। यूनियन नेताओं ने साफ़ लहजे में कहा कि मेहनत की क़ीमत सम्मान है, और सम्मान बिना सुधार के नहीं मिलता।

उधर, लगातार चार दिनों से बैंक बंद रहने के चलते आम अवाम को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग कामकाज के लिए शाखाओं तक पहुँचे लोग मायूस होकर लौटते दिखे। नक़दी निकासी, जमा, चेक क्लियरेंस और ज़रूरी दस्तावेज़ी काम ठप पड़े हैं। आरा की सड़कों पर आज जो मंज़र दिखा, वह सिर्फ़ एक हड़ताल नहीं था; यह नीति और नीयत पर सवाल था। अब गेंद हुकूमत के पाले में है या तो वह संवाद का दरवाज़ा खोले, या फिर इस इत्तिहाद की गूंज को और बुलंद होने दे।

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रिपोर्ट- आशीष कुमार