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सुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, अमित शाह की मौजूदगी में लगी मुहर

सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वे अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली, संगठन क्षमता और जनाधार के लिए जाने जाते हैं।

Suvendu Adhikari
Suvendu Adhikari- फोटो : news4nation

Suvendu Adhikari  : पश्चिम बंगाल में सरकार गठन को लेकर चल रही हलचल के बीच भाजपा विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चुनने का फैसला लिया गया। यह बैठक कोलकाता के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुए। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सुवेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर मौजूद विधायकों ने सहमति जताई। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य में दो उपमुख्यमंत्री भी बनाए जाएंगे। इनमें अभिनेत्री और भाजपा नेता रूपा गांगुली के नाम पर डिप्टी सीएम के रूप में सहमति बन चुकी है। वहीं दूसरा उपमुख्यमंत्री उत्तर बंगाल क्षेत्र से किसी पुरुष विधायक को बनाए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी अपने पास गृह विभाग का प्रभार भी रखेंगे। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार सुबह 10 बजे कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित होगा। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वे अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली, संगठन क्षमता और जनाधार के लिए जाने जाते हैं। नंदीग्राम आंदोलन से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने वाले सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की राजनीति में खास पहचान बनाई है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में हुआ था। उनके पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे हैं और सांसद भी रह चुके हैं। राजनीतिक परिवार से आने के कारण सुवेंदु की रुचि भी शुरू से राजनीति में रही। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की और छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।

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राजनीतिक सफर

सुवेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। वे 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के दौरान सबसे चर्चित नेताओं में शामिल रहे। इस आंदोलन ने उन्हें राज्यभर में बड़ी पहचान दिलाई। नंदीग्राम आंदोलन के बाद वे तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। सुवेंदु अधिकारी कई बार सांसद और विधायक चुने गए। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार में परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली।

भाजपा में शामिल होना

साल 2020 में सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद वे पश्चिम बंगाल में पार्टी के सबसे बड़े चेहरों में उभरे। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।

राजनीतिक पहचान

सुवेंदु अधिकारी को हिंदुत्व राजनीति, मजबूत संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ वाला नेता माना जाता है। पूर्व और दक्षिण बंगाल के कई इलाकों में उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है।

निजी जीवन 

सुवेंदु अधिकारी का परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी भी सक्रिय राजनीति में हैं। सुवेंदु अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली और जनसभाओं में आक्रामक भाषण शैली के लिए जाने जाते हैं।