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पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की संदिग्ध मौत, पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला शव

आशीष बनर्जी का शव उनके आवास के पास हट्टाला पाड़ा स्थित टीएमसी कार्यालय में मिला। उनकी मौत की परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन्होंने आत्महत्या की या घटना के पीछे कोई अन्य वजह थी।

Assembly Deputy Speaker Ashis Banerjee
Assembly Deputy Speaker Ashis Banerjee- फोटो : news4nation

Ashis Banerjee:  पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का शव रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उनके पास से एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और नोट की सत्यता की भी जांच की जा रही है।

आशीष बनर्जी का शव उनके आवास के पास हट्टाला पाड़ा स्थित टीएमसी कार्यालय में मिला। उनकी मौत की परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन्होंने आत्महत्या की या घटना के पीछे कोई अन्य वजह थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कथित सुसाइड नोट की जांच के बाद मामले में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

2001 से थे विधायक 

आशीष बनर्जी लंबे समय तक टीएमसी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने 2001 से 2026 तक लगातार रामपुरहाट विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। ममता बनर्जी सरकार में उन्होंने स्कूल शिक्षा और कृषि समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी। वह विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रह चुके थे।

बदनाम और अपमानित करने की कोशिश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित एक पन्ने के सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। उन्होंने कथित तौर पर राजनीति में आने पर अफसोस जताया। कथित नोट में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया और किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। उन्होंने यह भी लिखा कि पार्टी के भीतर होने वाली कुछ गलत चीजों को वह हमेशा स्वीकार नहीं कर पाते थे, लेकिन उनके खिलाफ खुलकर आवाज भी नहीं उठा सके।

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नोट में तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (TRDA) का भी कथित तौर पर जिक्र है। आशीष बनर्जी ने दावा किया कि अथॉरिटी के टेंडर, चेक जारी करने, प्लान की मंजूरी और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) से जुड़े फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम और अपमानित करने की कोशिश की गई। कथित नोट में उन्होंने राजनीति में प्रवेश को अपनी गलती भी बताया।

शिक्षक से सियासतदान बने 

राजनीति में आने से पहले आशीष बनर्जी छात्र राजनीति से जुड़े रहे थे और शिक्षक के तौर पर भी काम किया था। कथित नोट में उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी और अपने छात्रों से मिले स्नेह को भी याद किया।

2026 में हुई चुनावी हार 

2026 के विधानसभा चुनाव में आशीष बनर्जी ने रामपुरहाट से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें बीजेपी के ध्रुव साहा से 24 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में हार के बाद वह सक्रिय राजनीति में ज्यादा नजर नहीं आए। बीरभूम की राजनीति में आशीष बनर्जी का लंबा प्रभाव रहा। टीएमसी के पूर्व जिला अध्यक्ष और पार्टी के मजबूत नेता अनुव्रत मंडल के प्रभाव वाले दौर में भी वह जिले के प्रमुख पार्टी नेताओं में शामिल थे। 

पुलिस अब उनकी मौत के कारणों की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि क्या उन्होंने आत्महत्या की और अगर ऐसा हुआ तो उन्हें यह कदम उठाने के लिए किन परिस्थितियों ने मजबूर किया।