LATEST NEWS

  • तेजस्वी यादव का एनडीए सरकार पर तीखा हमला: कहा-उपचुनाव के नतीजों से साफ है, राज्य में टाइट है एनडीए की हवा
  • तेजस्वी यादव का एनडीए सरकार पर तीखा हमला: कहा-उपचुनाव के नतीजों से साफ है, राज्य में टाइट है

  • मुजफ्फरपुर में संदिग्ध स्थिति में बेहोश मिली महिला पॉलिटेक्निक की छात्रा : एसिड पीने की बात आ रही सामने, SKMCH में भर्ती
  • मुजफ्फरपुर में संदिग्ध स्थिति में बेहोश मिली महिला पॉलिटेक्निक की छात्रा : एसिड पीने की बात आ रही

  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
  • सीएम सम्राट की अनोखी पहल, बिहार की सड़कों को मिलेगी सात साल की सुरक्षा, अब होगी इस खास

  • दीपावली और धनतेरस को लेकर पुलिस अलर्ट: ज्वेलरी शोरूम्स की सुरक्षा जांचने पहुंचे सदर डीएसपी, दिए सख्त निर्देश
  • दीपावली और धनतेरस को लेकर पुलिस अलर्ट: ज्वेलरी शोरूम्स की सुरक्षा जांचने पहुंचे सदर डीएसपी, दिए सख्त निर्देश

  • छठ पूजा की तैयारियों को लेकर बेतिया नगर निगम सक्रिय, महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने किया घाटों का निरीक्षण
  • छठ पूजा की तैयारियों को लेकर बेतिया नगर निगम सक्रिय, महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने किया घाटों का

ऐतिहासिक फैसला: पिता-पुत्र डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को 'मौत की सजा', कोर्ट ने कहा- 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर'

मदुरै कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा और 1.40 करोड़ का जुर्माना।

ऐतिहासिक फैसला: पिता-पुत्र डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को 'म

N4N Desk - तमिलनाडु के बहुचर्चित साथानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में सोमवार को मदुरै सत्र न्यायालय ने एक मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी पाए गए सभी 9 पुलिसकर्मियों को 'मौत की सजा' सुनाई है। फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जी. मुथुकुमारन ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभतम से दुर्लभ) करार देते हुए कहा कि यह सत्ता के दुरुपयोग और अत्यधिक मानवीय बर्बरता का चरम उदाहरण है। अदालत ने दोषियों को मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ 40 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

लॉकडाउन उल्लंघन से शुरू हुई थी त्रासदी

यह मामला जून 2020 का है, जब मोबाइल कारोबारी पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को लॉकडाउन नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जहाँ कुछ ही दिनों के भीतर उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया था कि पिता-पुत्र को पूरी रात थाने में निर्दयतापूर्वक पीटा गया था, जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ था।

CBI जांच और महिला कांस्टेबल की गवाही

मद्रास हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल का बयान इस केस में सबसे अहम कड़ी साबित हुआ। उसने गवाही दी कि जयराज और बेनिक्स को पूरी रात लाठियों से पीटा गया था और थाने की मेज व दीवारों पर खून के निशान मौजूद थे। हालांकि, पुलिस ने साक्ष्य मिटाने के लिए CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं रखे थे, लेकिन तकनीकी और परिस्थितियों के आधार पर सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ पुख्ता चार्जशीट दाखिल की।

इन 9 दोषियों को मिली फांसी की सजा

इस मामले में कुल 10 आरोपी थे, जिनमें से एक आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की ट्रायल के दौरान कोविड से मौत हो गई थी। शेष 9 दोषियों में शामिल हैं:

  • NSIT
    Nsmch

    इंस्पेक्टर: एस. श्रीधर (तत्कालीन थाना प्रभारी)

  • सब-इंस्पेक्टर: पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन

  • हेड कॉन्स्टेबल: एस. मुरुगन और ए. समदुरई

  • कॉन्स्टेबल: एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु

  • 6 साल बाद मिला न्याय

लगभग 6 साल तक चली लंबी कानूनी सुनवाई के बाद आए इस फैसले ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। कोर्ट ने माना कि पुलिसकर्मियों ने योजनाबद्ध तरीके से टॉर्चर किया और कानून के रक्षक ही भक्षक बन गए। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की जीत है, बल्कि उन सभी सरकारी लोक सेवकों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है जो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर मानवाधिकारों का हनन करते हैं। फिलहाल इस फैसले के बाद तमिलनाडु सहित देशभर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने न्यायालय की सराहना की है।