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परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए नंदन नीलेकणि का बड़ा सुझाव, AI की मदद से ऐसे हो एग्जाम

नंदन नीलेकणि ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए परीक्षा आयोजित करने के मौजूदा तरीके में बदलाव का सुझाव दिया। वह परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के प्रमुख हैं।

Nandan Nilekani
Nandan Nilekani- फोटो : news4nation

Paper Leak :  देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या का समाधान व्यवस्थित तरीके से और तकनीक की मदद से किया जा सकता है। इसके लिए एक बड़ा प्रश्न बैंक तैयार करने और परीक्षा के दिन अंतिम समय में प्रश्नपत्र बनाने का सुझाव भी दिया है। इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा सकती है। 

नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को यहां आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में यह बात कही। वह परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं के मूल कारणों की पहचान कर तकनीक के जरिए उनका समाधान निकाला जा सकता है। ये ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान संभव है।

परीक्षा के दिन आखिरी समय में तैयार हो प्रश्नपत्र

नंदन नीलेकणि ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए परीक्षा आयोजित करने के मौजूदा तरीके में बदलाव का सुझाव दिया। उनके मुताबिक, प्रश्नपत्र पहले से तैयार रखने के बजाय सवालों का एक विशाल बैंक बनाया जाना चाहिए। इसके बाद परीक्षा के दिन अंतिम समय में उसी प्रश्न बैंक से प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र के अस्तित्व में आने से ही उसे लीक करके बेचने का आर्थिक प्रलोभन पैदा होता है। यदि प्रश्नों के बड़े संग्रह से परीक्षा के दिन ही प्रश्नपत्र तैयार किया जाए, तो पहले से प्रश्नपत्र हासिल करने और उसे बेचने की संभावना से जुड़ा आर्थिक प्रोत्साहन खत्म हो सकता है। AI से परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र तैयार करने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर नीलेकणि ने सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने इसे परीक्षा सुधारों के लिए विचाराधीन तकनीकी विकल्प के तौर पर रखा।

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कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने पर भी विचार

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में बदलने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि देश में फिलहाल लगभग 1.5 लाख स्थानों पर छात्र कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं दे सकते हैं। सभी परीक्षाओं को इस प्रणाली में लाने के लिए इन केंद्रों के नेटवर्क का विस्तार करना होगा।

NEET-UG पेपर लीक के बाद गठित हुई थी टास्क फोर्स

परीक्षा सुधारों के लिए इस साल जुलाई में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया था। मई में NEET-UG प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी थी। इस घटना ने देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को जन्म दिया था और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

नीलेकणि ने कहा कि टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली से जुड़ी इन व्यवस्थागत समस्याओं पर काम करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री उनकी समिति के सुझावों को लागू करने के लिए काफी उत्सुक हैं। आधार डिजिटल पहचान प्रणाली के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले नीलेकणि ने तकनीक के व्यापक इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी तकनीकी व्यवस्था को लागू करते समय यह देखना जरूरी है कि उससे लोगों के लिए ऐसा समाधान तैयार हो, जिसमें सभी का लाभ हो सके।