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इतिहास लेखन के एक युग का हुआ अंत, दिग्गज इतिहासकार सुमित सरकार का 87 वर्ष की उम्र में निधन, किताबों में जिंदा रहेंगे उनके विचार

Sumit Sarkar Death: आधुनिक भारत के प्रख्यात इतिहासकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर सुमित सरकार का 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

Historian Sumit Sarkar
नहीं रहे इतिहास के फलक सुमित सरकार - फोटो : social Media

Sumit Sarkar Death: आधुनिक भारत के प्रख्यात इतिहासकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर सुमित सरकार का 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ भारतीय इतिहास लेखन की दुनिया ने एक ऐसे विद्वान को खो दिया, जिसने इतिहास को देखने और समझने की पारंपरिक दृष्टि को नई दिशा दी। इतिहास उनके लिए केवल राजाओं, वायसराय, युद्धों और सत्ता के गलियारों की कहानी नहीं था, बल्कि किसानों, मजदूरों, महिलाओं और आम लोगों के संघर्षों का भी उतना ही महत्वपूर्ण दस्तावेज था।

सुमित सरकार की चर्चित पुस्तक ‘Modern India: 1885–1947’ इतिहास के विद्यार्थियों और यूपीएससी अभ्यर्थियों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय रही है। इसके अलावा ‘The Swadeshi Movement in Bengal’ और ‘Writing Social History’ जैसी उनकी कृतियों ने भारतीय राष्ट्रवाद, औपनिवेशिक शासन और जन आंदोलनों को सामाजिक और वर्गीय दृष्टिकोण से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनका जन्म इतिहासकारों के परिवार में हुआ था। उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसिडेंसी कॉलेज से इतिहास में बीए ऑनर्स किया और बाद में कोलकाता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और पीएचडी पूरी की। बर्दवान विश्वविद्यालय और कोलकाता विश्वविद्यालय में अध्यापन से करियर शुरू करने के बाद वे दिल्ली विश्वविद्यालय पहुंचे और करीब तीन दशकों तक अध्यापन व शोध से जुड़े रहे। वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वोल्फसन कॉलेज में फेलो भी रहे और कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी और सहजता थी। उनके एक पूर्व छात्र के अनुसार, उन्हें देखकर कोई सहजता से अंदाजा नहीं लगा सकता था कि वे इतने बड़े विद्वान हैं। रिक्शावाले से उनका व्यवहार हो या छात्रों और सहकर्मियों से संवाद, उनकी विनम्रता हमेशा समान रही।

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सुमित सरकार को 2003 में स्वतंत्रता आंदोलन पर उनके कार्य के लिए सरित चटर्जी मेमोरियल अवॉर्ड मिला। 2004 में ‘Writing Social History’ के लिए उन्हें रवींद्र पुरस्कार दिया गया, जिसे उन्होंने बाद में किसानों के प्रति तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार की नीतियों के विरोध में लौटा दिया।डॉ. रामानंद पाण्डेय ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुमित सरकार जैसे इतिहासकार सदियों में कभी-कभार जन्म लेते हैं। उनका निधन इतिहास लेखन की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी किताबें, शोध और विचार आने वाली पीढ़ियों को इतिहास समझने की राह दिखाते रहेंगे।