LATEST NEWS

  • पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 24 घंटे में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों में आरोपी 48 अभियुक्त  को किया गिरफ्तार
  • पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 24 घंटे में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों में आरोपी 48 अभियुक्त

  • Saran Flood News
  • Saran Flood News: गंगा, सरयू, सोन और गंडक के उफान से छपरा के कई पंचायतों का संपर्क टूटा

  •  ‘जांच एवं उपचार - चिकित्सा आपके द्वार’
  • बिहार के 6 करोड़ लोगों की होगी स्वास्थ्य जाँच, निशांत की अपील- ‘जांच एवं उपचार - चिकित्सा आपके

  • Bihar News : कैमूर में दुर्गावती नदी के उफान से कई गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों ने किया पलायन, एसडीएम ने लिया स्थिति का जायजा
  • Bihar News : कैमूर में दुर्गावती नदी के उफान से कई गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों ने किया

  • सुपौल के ऐतिहासिक राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी में 4 सितंबर को मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
  • सुपौल के ऐतिहासिक राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी में 4 सितंबर को मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

दवा के नाम पर नशे का खेल खत्म, अल्कोहल युक्त सिरप पर सख्ती, इलाज और दुरुपयोग के बीच ये सख्त नियम लागू

Alcohol Based Medicines: नशे की गिरफ्त में फंसते समाज के बीच सरकार का एक अहम फैसला उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।...

Crackdown on Alcohol Syrups Balancing Treatment and Misuse R
अल्कोहल युक्त सिरप पर सख्ती- फोटो : social Media

Alcohol Based Medicines: नशे की गिरफ्त में फंसते समाज के बीच सरकार का एक अहम फैसला उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। ज्यादा मात्रा में अल्कोहल वाली पीने योग्य दवाओं और सिरप की बिक्री पर सख्ती का कदम लंबे समय से उठ रही उस मांग का जवाब है, जिसमें इन दवाओं के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई जाती रही है। इलाज के नाम पर बिकने वाली कुछ दवाएं धीरे-धीरे नशे का आसान जरिया बनती जा रही थीं, जिस पर अब लगाम लगाने की जरूरत महसूस की गई।

दरअसल, 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल वाली दवाओं की बिक्री के लिए लाइसेंस, डॉक्टर की पर्ची और रिकॉर्ड रखने जैसे नियमों को सख्त किया गया है। यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि कई जगहों पर ऐसी दवाओं का इस्तेमाल नशे के विकल्प के तौर पर किया जाने लगा था। खासकर किशोरों और नशे की आदत से जूझ रहे लोगों के बीच इन दवाओं का दुरुपयोग चिंता का विषय बन चुका था।

Diarch GO

हमारे समाज में अक्सर दवा और शराब को लेकर बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला शब्द ‘दवा-दारू’ कई बार इसी गलत मानसिकता को बढ़ावा देता है, जहां उपचार की चीज को नशे का साधन बना लिया जाता है। यह प्रवृत्ति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाती है।

चिकित्सा संस्थानों और विशेषज्ञों ने भी समय-समय पर इस खतरे की ओर इशारा किया है। नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज कराने वाले कई मरीजों में कफ सिरप और अल्कोहल युक्त दवाओं के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने भी चेताया है कि जहां शराब की उपलब्धता सीमित होती है या नशाबंदी लागू होती है, वहां ऐसी दवाओं के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ जाती है।

NSIT
Nsmch

हालांकि केवल नियम बना देना ही पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती इन नियमों को जमीन पर लागू करने की है। इसके लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था, पर्याप्त संख्या में ड्रग इंस्पेक्टर और फार्मेसी स्तर पर जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। ऐसी दवाओं की बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि संदिग्ध खरीद-बिक्री पर नजर रखी जा सके।

डॉक्टरों की भूमिका भी बेहद अहम है। उन्हें जरूरत के अनुसार ही ऐसी दवाएं लिखनी चाहिए और मरीजों को इनके संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना चाहिए। किसी भी दवा का इस्तेमाल लापरवाही से किया जाए तो वह इलाज के बजाय नुकसान का कारण बन सकती है।

सरकार का यह फैसला जनस्वास्थ्य की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। मकसद यह नहीं कि जरूरतमंद मरीजों तक दवा की पहुंच रोकी जाए, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जीवन बचाने वाली दवाएं किसी की जिंदगी बर्बाद करने का जरिया न बनें। अब जरूरत है कि इस व्यवस्था को ईमानदारी और सख्ती के साथ लागू किया जाए, तभी नशे के इस छिपे हुए खतरे पर वास्तविक नियंत्रण पाया जा सकेगा।