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बाढ़ में राशन के चावल की गुणवत्ता पर सवाल, मजदूरों ने कैमरे पर खोली मिलावट की पोल

बाढ़ में मामले पर CMR गोदाम में तैनात एक अधिकारी से जब चावल की गुणवत्ता और मजदूरों के लगाए आरोपों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल किया।

Poor Quality Rice in Bihar
Poor Quality Rice in Bihar - फोटो : news4nation

Bihar News :  पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में जनवितरण प्रणाली (PDS) के जरिए उपभोक्ताओं को मिलने वाले चावल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि बाढ़ के बाजार समिति स्थित CMR गोदाम से खराब और घटिया गुणवत्ता का चावल SFC गोदाम भेजा जा रहा है। इसके बाद यही चावल जनवितरण दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें कई जगहों पर सड़ा, खुदा और मिलावटी चावल मिल रहा है। चावल की गुणवत्ता खराब होने के बावजूद राशन उपभोक्ताओं के सामने उसे लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

मजदूरों ने कैमरे पर दिखाया खराब चावल

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब गोदाम में काम करने वाले मजदूरों ने कैमरे पर चावल की गुणवत्ता दिखाई। मजदूरों ने लाइव दिखाया कि किस तरह बोरियों में खराब और घटिया किस्म का चावल भरा जा रहा है और उसे जनवितरण प्रणाली के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। मजदूरों ने गोदाम में रखे चावल की बोरियों को खोलकर भी दिखाया। उनका दावा है कि चावल की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है और इसी तरह का चावल आगे आपूर्ति के लिए भेजा जा रहा है।

CMR गोदाम से SFC और फिर PDS दुकानों तक चावल

बताया जा रहा है कि बाढ़ बाजार समिति स्थित CMR गोदाम से चावल SFC गोदाम पहुंचाया जाता है। इसके बाद SFC के माध्यम से जनवितरण दुकानों तक इसकी आपूर्ति होती है। आरोप है कि अगर CMR स्तर पर ही खराब चावल की आपूर्ति हो रही है तो वह आगे पूरी वितरण व्यवस्था के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल चावल की गुणवत्ता जांच को लेकर है। आखिर गोदाम से चावल निकलने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर होती है और खराब चावल को आपूर्ति के लिए मंजूरी कैसे मिल जाती है?

अधिकारी ने साधी चुप्पी

मामले पर CMR गोदाम में तैनात एक अधिकारी से जब चावल की गुणवत्ता और मजदूरों के लगाए आरोपों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल किया। वहीं, मौके पर इस पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से बयान देने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था।

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ऐसे में मजदूरों द्वारा कैमरे पर दिखाई गई तस्वीरें राशन वितरण व्यवस्था और चावल की गुणवत्ता की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच करता है या नहीं और उपभोक्ताओं को कथित तौर पर घटिया चावल की आपूर्ति करने के मामले में जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं।

रवि शंकर की रिपोर्ट