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फिर सुर्खियों में भारत-नेपाल सीमा विवाद ,नेपाल 1 रुपए के सिक्के से नहीं हटाएगा विवादित नक्शा, नए डिजाइन में भी दिखेगा विवादित नेशनल मैप

India Nepal Dispute:नेपाल के एक रुपए के सिक्के पर छपे नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। भारत इस दावे को स्वीकार नहीं करता है...

Nepal Keeps Disputed Map On Rs 1 Coin Amid Border Row
नेपाल 1 रुपए के सिक्के से नहीं हटाएगा विवादित नक्शा- फोटो : social Media

India Nepal Dispute: नेपाल में एक रुपए के सिक्के को लेकर एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा विवाद की सियासी गर्माहट सामने आ गई है। नेपाल सरकार ने 21 जुलाई को नेपाल राष्ट्र बैंक के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें एक रुपए के सिक्के पर छपे विवादित राष्ट्रीय नक्शे को हटाकर उसकी जगह मुस्तांग के ऐतिहासिक बौद्ध मठ की तस्वीर लगाने का सुझाव दिया गया था।नेपाल सरकार के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि सिक्के पर राष्ट्रीय नक्शे को लेकर काठमांडू अपनी पुरानी नीति से पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालांकि, सरकार ने नेपाल राष्ट्र बैंक को निर्देश दिया है कि नए सिक्के के डिजाइन में राष्ट्रीय नक्शे के साथ-साथ लो घेकर मठ को भी शामिल किया जाए। यानी अब प्रस्तावित सिक्के पर सांस्कृतिक पहचान और विवादित भौगोलिक दावे, दोनों को जगह देने की तैयारी है।

दरअसल, नेपाल के एक रुपए के सिक्के पर छपे नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। भारत इस दावे को स्वीकार नहीं करता है और इन क्षेत्रों को भारतीय भूभाग का हिस्सा मानता है। यही वजह है कि सिक्के पर नक्शे को लेकर उठे सवाल ने एक बार फिर दोनों देशों के पुराने सीमा विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।नेपाल राष्ट्र बैंक ने पहले सुझाव दिया था कि विवादित नक्शे की जगह अपर मुस्तांग स्थित लो घेकर मठ की तस्वीर सिक्के पर लगाई जाए। यह मठ नेपाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मठ की स्थापना 8वीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने की थी और इसे हिमालय क्षेत्र के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है।

नेपाल में सिक्कों और नोटों की पहचान भी समय के साथ बदली है। राजशाही के दौर में नेपाली मुद्रा पर राजा महेंद्र, राजा बीरेंद्र और राजा ज्ञानेंद्र की तस्वीरें हुआ करती थीं। लेकिन साल 2006 के राजनीतिक परिवर्तन के बाद मुद्रा पर राजशाही प्रतीकों की जगह माउंट एवरेस्ट, वन्यजीव, राष्ट्रीय धरोहर और सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल किया जाने लगा।भारत-नेपाल सीमा विवाद की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। भारत द्वारा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक सड़क निर्माण और उद्घाटन के बाद नेपाल ने इसका विरोध किया। इसके बाद मई 2020 में नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया गया। जून 2020 में नेपाल की संसद ने संविधान संशोधन कर इस नक्शे को आधिकारिक मान्यता दे दी। इसके बाद यह नक्शा नेपाल के सरकारी दस्तावेजों, स्कूल की किताबों, पासपोर्ट, 100 रुपए के नोट और कुछ सिक्कों पर इस्तेमाल किया जाने लगा।

राजनयिक नजरिए से देखें तो सिक्के पर नक्शे को बनाए रखने का फैसला नेपाल की घरेलू राजनीति और राष्ट्रवादी भावनाओं से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। वहीं भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से किया जाना चाहिए।अब नेपाल राष्ट्र बैंक नए निर्देशों के अनुसार सिक्के का डिजाइन तैयार करेगा। इसमें राष्ट्रीय नक्शा और लो घेकर मठ, दोनों को शामिल किया जाएगा। यह फैसला आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंधों और सीमा विवाद की सियासत में एक अहम मुद्दा बना रह सकता है।

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