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फर्जी डिग्री पर बहाल हुए शिक्षकों की बढ़ेगी मुसीबत, पटना हाई कोर्ट की बिहार सरकार को दो सप्ताह की मोहलत

फर्जी डिग्री पर बहाल हुए शिक्षकों की बढ़ेगी मुसीबत, पटना हाई

पटना.  पटना हाइकोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की बहाली मामलें पर सुनवाई की। रंजीत पंडित की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राज्य निगरानी विभाग को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का और मोहलत दिया है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि अभी भी 72 हजार शिक्षकों के फोल्डर नहीं प्राप्त हुआ है। ये मामला काफी दिनों से चल रहा है, लेकिन जांच की रफ़्तार काफी धीमी हैँ। पूर्व की सुनवाई में  कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह एक समय सीमा निर्धारित करें,जिसके तहत सभी सम्बंधित शिक्षक अपना डिग्री व अन्य कागजात प्रस्तुत करें।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित समय के भीतर कागजात व रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में जाली डिग्रियों के आधार पर शिक्षक राज्य में काम कर रहे हैं। साथ ही वे वेतन उठा रहे है।  इससे पूर्व कोर्ट ने 2014 के एक आदेश में कहा था कि जो इस तरह की जाली डिग्री के आधार पर राज्य सरकार के तहत शिक्षक है,उन्हें ये अवसर दिया जाता है कि वे खुद अपना इस्तीफा दे दें, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी ।

कोर्ट ने मामलें को निगरानी विभाग को जांच के लिए सौंपा था। उन्हें इस तरह के शिक्षकों को ढूंढ निकालने का निर्देश दिया था। 31जनवरी, 2020 के सुनवाई दौरान निगरानी विभाग ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि राज्य सरकार द्वारा इनके सम्बंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है,लेकिन अभी भी एक लाख दस हजार से अधिक शिक्षकों के रिकॉर्ड उपलब्ध नही है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 13 मार्च,2024 को होगी।