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आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा अमेरिका में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव में दिखी भारतीय संस्कृति की चमक, एक मंच पर 180 देशों की संस्कृति का हुआ जुटान

आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा अमेरिका में आयोजित विश्व संस्कृति महोत

DESK: आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक तथा वैश्विक मानवतावादी आघ्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर के द्वारा अमेरिका के राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में ‘विश्व संस्कृति महोत्सव’ का सफल आयोजन किया गया। 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2023 तक आयोजित इस वैश्विक सांस्कृतिक महोत्सव में विश्व के 180 देशों के 10 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया . इस दौरान सभी देशों की संस्कृति का अद्भूत संगम देखने को मिला. एक मंच पर शांति, मानवता तथा विविधता में एकता का अद्वितीय मिशाल कायम हुआ है। 180 से अधिक देशों के इस अद्भूत मंच पर भारतीय संस्कृति की चमक सबसे अधिक रही तथा पूरे विश्व ने भारतीय संस्कृति की सराहना की।

आर्ट आफ लिविंग बिहार के एपेक्स रमेश कुमार ने दी जानकारी

आर्ट आफ लिविंग बिहार के एपेक्स रमेश कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम में बिहार से भी कई लोगों ने भाग लिया है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये आज पटना में एक बैठक कर परमपूज्य गुरूदेव सहित इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी देषों को हार्दिक बधाई एवं आभार व्यक्त किया गया। रमेश कुमार ने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा पूरे विश्व के भिन्न-भिन्न देशों के विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं के संरक्षण एवं इससे सभी को अवगत कराने के उद्देश्य के साथ पूरे विश्व को एक मंच पर लाने हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के आयोजन से भारत से बाहर विदेशों में भारत का गौरव बढा है तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आन-बान एवं शान स्थापित हुई है। भारत के लिए यह सबसे बड़े गौरव का क्षण है। 

अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन के नेशनल मॉल में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने ‘एक एक विश्व परिवार’ के सन्देश के साथ सीमाओं, धर्मों और नस्लों के विभाजन को समाप्त करने के उद्देश्य से विश्व के 180 देशों के लोगों को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। । रमेश कुमार ने बताया कि वाशिंगटन में शांति, मानवता और संस्कृति के पृथ्वी के सबसे बड़े उत्सव के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम इस कार्यक्रम में 180 से अधिक देशों के 21,000 से अधिक कलाकारों, कई राष्ट्राध्यक्षों और विचारकों ने भाग लिया जो अपने आप में एक रिकाॅर्ड है.

इस अवसर पर वैश्विक मानवतावादी और शांतिदूत, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि, “यह हमारी विविधता का समारोह मनाने का एक सुंदर अवसर है। हमारा ग्रह इतना विविधतापूर्ण है, फिर भी एकता,  हमारे मानवीय मूल्यों में अंतर्निहित है। आइए आज इस अवसर पर हम समाज में और अधिक आनंद लाने के लिए प्रतिबद्ध हों। आइए सबके चेहरे पर मुस्कान लाएं। यही मानवता है।  हम सब इसी से बने हैं। कोई भी उत्सव तब तक गहराई नहीं प्राप्त कर पाता जब तक उसे ज्ञान का समर्थन न मिले, और वह ज्ञान हम सभी के भीतर है। बुद्धिमत्ता यह पहचानने में है कि हम सभी अद्वितीय हैं और हम सभी एक हैं। मैं एक बार फिर सबको बता दूं- हम सब एक-दूसरे के हैं। हम सभी एक वैश्विक परिवार के सदस्य हैं। आइए अपनी एकता का उत्सव मनाएं, आइए हम चुनौतियों को स्वीकार करें और व्यावहारिक रूप से उनका सामना करें। आइए हम वर्तमान पीढ़ी  और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य का स्वप्न देखें।

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वैश्विक कार्यक्रम में  ग्रैमी पुरस्कार विजेता चंद्रिका टंडन तथा 200  साथी कलाकारों द्वारा  ‘अमेरिका द ब्यूटीफुल’ और ‘वंदे मातरम’ की भव्य प्रस्तुति,  ‘पंचभूतम’, 1000 कलाकारों द्वारा भारतीय शास्त्रीय नृत्य और अनूठी शास्त्रीय सिम्फनी, ग्रैमी पुरस्कार विजेता मिकी फ्री के नेतृत्व में 1000 वैश्विक गिटार कलाकारों का शानदार गिटारवादन और अफ्रीका, जापान और मध्य पूर्व के पारंपरिक नृत्य जैसे मनमोहक प्रदर्शनों ने सभी को रोमांचित कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि- “जबकि हम सभी समृद्धि का विस्तार करने और अपने ग्रह के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास करते हैं, यह स्वाभाविक है कि हम प्रकृति पर अत्याचार जैसी चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं। चाहे वह प्राकृतिक आपदाएँ हों, मानव निर्मित आपदाएँ हों, संघर्ष हों, या व्यवधान हों, यह महत्वपूर्ण है कि एक अन्योन्याश्रित दुनिया में, हम हमेशा एक-दूसरे के लिए मौजूद रहें। आर्ट ऑफ लिविंग इस विषय में एक प्रेरणादायक उदाहरण रहा है और मैंने व्यक्तिगत रूप से हाल ही में आपके द्वारा यूक्रेन संघर्ष के दौरान किये गए परिवर्तनकारी कार्य को देखा है। आज उनका संदेश, आपका संदेश और हमारा संदेश, देखभाल और साझा करने भी भावना, उदारता, समझदारी और सहयोग की सद्भावना, का होना चाहिए। यही वह बात है जो हम सभी को यहां एक साथ लेकर आई है।”

विश्व संस्कृति महोत्सव के पहले दिन महामहिम बान की मून, संयुक्त राष्ट्र के 8वें महासचिवय डी.सी. मेयर म्यूरियल बोसेरय मिशिगन कांग्रेसी श्री थानेदारय श्री हकुबुन शिमोमुरा, सांसद, पूर्व शिक्षा, संस्कृति, खेल और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री, जापानय संयुक्त राष्ट्र के पूर्व उप महासचिव और यूएनईपी के कार्यकारी निदेशक, साथ ही नॉर्वे के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय विकास मंत्री एरिक सोल्हेम जैसे अन्य वैश्विक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उन्होंने कई वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे संघर्षरत विश्व में एकता, शांति और सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए अपना दृष्टिकोण साझा किया ।

पोप ने रेवरेंड बिशप एमेरिटस मार्सेलो सांचेज सोरोंडो, पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज के चांसलर एमेरिटस, द होली सी के माध्यम से इस अवसर पर एक सम्मानीय संदेश भी साझा कियाय “विश्व शांति के लिए, हमें आंतरिक शांति की आवश्यकता है। शांति का संचार करने के लिए हमें शांति से रहना होगा। और शांति से जीने के लिए हमें जीवन जीने की कला की आवश्यकता है। शांति से जीने की कला पाने के लिए, हमें ईश्वर के साथ संवाद करने की आवश्यकता है। ईश्वर मनुष्य के  शत्रु नहीं हैं । ईश्वर मित्र हैं, ईश्वर प्रेम है। और ईश्वर को प्राप्त करने के लिए, हमें ध्यान और प्रार्थना की ओर वापस आना होगा। हमें अपनी जड़ों की ओर वापस आने की आवश्यकता है।श् इसलिए, इस नाजुक क्षण में, हमें भगवान का आह्वान करने की आवश्यकता है और पोप फ्रांसिस के नाम पर, कि हम सभी मनुष्यों की बिरादरी हैं, मैं आपको आशीर्वाद देता हूं, और मैं इस बहुत बड़ी बैठक को आशीर्वाद देता हूं, और मुझे लगता है कि यह जीवन का कार्य है, यह  वास्तव में हमारी मानवता का भविष्य होगा।

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के नेत्ृत्व मे आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित, विश्व संस्कृति महोत्सव ने सीमाओं को पार कर मानवता और भाईचारे के धागे में बंधी संस्कृतियों की समृद्ध टेपेस्ट्री का जश्न मनाया। डब्ल्यू.सी.एफ संगीत और नृत्य के माध्यम से स्थानीय और स्वदेशी परंपराओं के संरक्षण के लिए एक मंच प्रदान करता है, साथ ही सभी को आनंद लेने और आनंद लेने का अवसर भी प्रदान करता है। यह प्रेम, करुणा और मित्रता जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के पुनरुद्धार के लिए एक आंदोलन है।

इस अवसर पर बोलते हुए, संयुक्त राष्ट्र के 8वें महासचिव महामहिम बान की-मून ने कहा, “संस्कृति पुल बनाती है, दीवारें तोड़ती है, बातचीत और आपसी समझ के माध्यम से दुनिया को एक साथ लाती है और लोगों और राष्ट्रों के बीच एकता और सद्भाव बढ़ाती है। संस्कृति सभी वैश्विक नागरिकों के बीच प्रभावशाली आदान-प्रदान पैदा कर सकती है। आज, विश्व की सारी सांस्कृतिक समृद्धि यहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका के नेशनल मॉल में एक साथ आई है। मैं गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर की एकता और विविधता के प्रेरक दृष्टिकोण की सराहना करता हूं। हमें इन समारोहों की और अधिक आवश्यकता है, और अधिक एक साथ आने की, अधिक शांति की, और अधिक सहयोग, एकजुटता और साझेदारी की आवश्यकताहै। इस प्रकार हम उन बड़ी चुनौतियों पर डटे रहेंगे जिनका हम अभी सामना कर रहे हैं। इस तरह हम शांति स्थापित करेंगे और संघर्षों का समाधान करेंगे, भूख को समाप्त करेंगे, स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करेंगे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आगे बढ़ाएंगे और महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाएंगे। इसी तरह हम आगे बढ़ेंगे और किसी को पीछे नहीं छोड़ेंगे।”

भीड़ का उत्साह और खुशी स्पष्ट थी क्योंकि हजारों राष्ट्रीय झंडे एकता की भावना में हवा में लहरा रहे थे, और कलाकारों के बीच ऊर्जा भी समान रूप से संक्रामक थी।