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अब बूढ़ों की बीमारी नहीं रहा हार्ट अटैक, 15 से 18 साल के बच्चों में तेजी से हो रहा है ब्लॉकेज, ये आदतें पड़ सकती हैं भारी

Heart Attack: दिल की बीमारी को अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

Heart Risk
अब बूढ़ों की बीमारी नहीं रहा हार्ट अटैक- फोटो : social Media

Heart Attack: दिल की बीमारी को अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बदलती लाइफस्टाइल, खान-पान की बिगड़ती आदतें और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने कम उम्र के लोगों के दिल पर भी खतरे की घंटी बजा दी है। राजधानी पटना के बड़े अस्पतालों में सामने आए आंकड़े इस बदलती तस्वीर की गंभीरता को उजागर कर रहे हैं। इंडियन कॉडियोलॉजी ऑफ इंडिया, बिहार चैप्टर की ओर से पटना के आईजीआईसी, आईजीआईएमएस, एनएमसीएच, पीएमसीएच और पटना एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों की केस स्टडी के आधार पर सर्वे किया गया। सर्वे में जनवरी से अब तक करीब आठ महीने के दौरान 11,209 मरीजों की इलाज के दौरान मौत होने की बात सामने आई है। इनमें करीब 40 फीसदी मौतें हार्ट अटैक से बताई गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हार्ट अटैक से हुई मौतों में करीब 15 फीसदी नाबालिग और युवा शामिल बताए गए हैं।

15 से 18 साल के बच्चों में हार्ट ब्लॉकेज

सबसे गंभीर तस्वीर इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान यानी आईजीआईसी से सामने आई है। बीते आठ महीनों में यहां 247 नाबालिग बच्चे हृदय संबंधी परेशानी के इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें हार्ट ब्लॉकेज पाया गया। इन बच्चों की उम्र महज 15 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है।पांचों सरकारी अस्पतालों और कुछ निजी सेंटरों को मिला दें तो कम उम्र में हार्ट ब्लॉकेज के मामलों की संख्या करीब 672 तक पहुंचने का दावा किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों और युवाओं में बढ़ता वजन, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और शारीरिक गतिविधियों की कमी बड़े रिस्क फैक्टर बनकर उभर रहे हैं।

19 से 25 साल की उम्र में भी खतरे की दस्तक

सिर्फ नाबालिग ही नहीं, बल्कि 19 से 25 साल की उम्र के युवाओं में भी हार्ट ब्लॉकेज के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम उम्र में कोरोनरी ब्लॉकेज सामान्य स्थिति नहीं है। ऐसे मामलों में परिवार में कोलेस्ट्रॉल की समस्या, जन्मजात बीमारियां और अन्य गंभीर रिस्क फैक्टर्स की जांच बेहद जरूरी है।

14 जिलों से पटना भाग रहे हार्ट अटैक के मरीज

पटना अब सिर्फ राजधानी नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लिए गंभीर हार्ट मरीजों के इलाज का बड़ा सेंटर बन गया है। वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, आरा, छपरा, नवादा, मधेपुरा, गोपालगंज और नालंदा समेत 14 जिलों से हार्ट अटैक के मरीज फौरन पटना का रुख कर रहे हैं। समय पर पहुंचने वाले मरीजों को अशोक राजपथ स्थित आईजीआईसी या बेली रोड स्थित आईजीआईएमएस की कैथ लैब में गोल्डन आवर के दौरान जरूरी इलाज मिल पा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती घंटों में इलाज शुरू होना मरीज की धमनियों को बचाने और जान बचाने में बेहद अहम हो सकता है। पटना में फिलहाल आठ निजी अस्पतालों में कैथ लैब पूरी तरह ऑपरेशनल बताई जा रही हैं। डॉक्टरों का संदेश साफ है दिल की बीमारी को उम्र से जोड़कर नजरअंदाज करने का दौर खत्म हो चुका है। कम उम्र में मोटापा, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और कम शारीरिक गतिविधि जैसे संकेतों को हल्के में लेना भविष्य में गंभीर कार्डियक संकट को दावत दे सकता है।

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